यहां शाम को ही देनी पड़ती है मरीजों को छुट्टी

कुल्लू। वर्ष 1995-96 में खुले डिगेढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात 18 साल बाद भी जस के तस हैं। यह अस्पताल अभी भी किराये के भवन में चल रहा है। हालत यह है कि पीएचसी में अकोमोडेशन की कमी के कारण यहां उपचाराधीन मरीजों को शाम को ही छुट्टी देनी पड़ रही है। पीएचसी में इंडोर सुविधा न होने के साथ-साथ स्टाफ नर्स का पद भी खाली है। ग्रेड-2 की इस पीएचसी में नियमानुसार छह बिस्तरों का होना जरूरी है, लेकिन किराये के कमरों में चल रही डिगेढ़ पीएचसी पिछले 18 साल से खुद वेंटीलेटर पर है। किराये का भवन होने के कारण यहां मुश्किल से दो बिस्तर लगाए गए हैं, लेकिन बुखार और अन्य छोटी-मोटी बीमारी के मरीजों को सुबह भरती कर शाम को छुट्टी देनी पड़ती है। हालांकि यहां पर पीएचसी भवन बनना है, जिसका शिलान्यास पूर्व सरकार के विधायक किशोरी लाल सागर ने करीब दो साल पूर्व किया है, परंतु हैरानी की बात है कि आधारशिला रखने के बाद अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। निर्माण कार्य के लिए न तो लेानिवि ने कोई कदम उठाए हैं और न ही स्वयं स्वास्थ्य विभाग ने कोई हरकत की है। बताया जा रहा है कि जिस भवन में पीएचसी चल रही है, वह भवन कृषि विभाग का है, लेकिन कमरों के अभाव से यहां इंडोर सुविधा न के बराबर है। क्षेत्र के लोगों सुरेश कुमार, संजय ठाकुर, मोहन ठाकुर और तेज राम ठाकुर ने कहा कि किराये के भवन में चल रहे इस अस्पताल में न तो मरीजों के भरती करवाने की सुविधा है और न ही यहां स्टाफ नर्स है। उन्होंने कहा कि यहां अगर किसी बीमार को भर्ती किया भी जाता है तो शाम के उसे छुट्टी देनी पड़ती है। यहां उपचार के लिए आने वाले टकरासी, मुहान, विशलाधर तथा लगौटी पंचायतों के मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि पीएचसी भवन का निर्माण होने से यहां मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
कोट
-स्वास्थ्य विभाग आनी ने भवन निर्माण के लिए जमीन सहित अन्य सभी कागजी प्रक्रियाओं को पूरा कर लोनिवि को सौंप दिया गया है। अब अगला काम लोनिवि को करना है।
-डा. ज्ञान ठाकुर बीएमओ आनी
– डिगेड पीएचसी भवन की टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी है। जल्द ही भवन का निर्माण शुरू किया जाएगा।

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