
नगर पंचायत की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पहले चबूतरे के निर्माण के लिए हजारों खर्च कर डाले, अब उस चबूतरे को गिराया जा रहा है। चबूतरे को अवैध्ध रूप से सरकारी भूमि पर बनाने का आरोप था। चबूतरे के अवैध निर्माण का मामला अमर उजाला ने उजागर किया था। अब विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए नगर पंचायत ने खुद ही चबूतरे को हटाना शुरू कर दिया है। यह चबूतरा जैन मार्किट में बनाया गया था तथा आरोप लगा था कि इस चबूतरे का आकार बड़ा कर दिया गया है, जिस कारण रास्ता तंग हो गया था। साथ ही यह सरकारी भूमि पर बिना अनुमति लिए बनाया गया था। नगर पंचायत की ओर से रास्ते में अवरोध न होने देने का तर्क देकर कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।
अमर उजाला में अवैध चबूतरे के निर्माण का समाचार प्रकाशित होते ही नपं ने हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वार्ड नंबर दो में स्थित जैन मार्किट के समीप नपं ने सरकार की अनुमति लिए बिना ही सरकारी भूमि पर चबूतरे का निर्माण कर दिया था। जरूरत से अधिक स्थान पर चबूतरे का निर्माण करने से मार्केट का रास्ता तंग हो रहा था। आरटीआई के तहत सूचना में खुलासा हुआ कि चबूतरे के निर्माण में 98 हजार रुपये की राशि खर्च हुई है। सरकारी भूमि पर निर्माण के लिए सरकार से अनुमति नहीं ली, दूसरा नगर पंचायत में भी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। जनता पहले ही बड़े आकार के चबूतरे के निर्माण का विरोध कर रही थी।
शिकायत मिलने के बाद पटवारी, कानूनगो ने अवैध कब्जे की मिसल तैयार कर अधिकारियों को भेज दी लेकिन कानूनी गाज गिरने से पहले ही नपं ने हटाना शुरू कर दिया है।
चबूतरे का निर्माण मेरे कार्यकाल से पहले हुआ है। रास्ता बाधित न हो, इसलिए आकार घटाया जा रहा है।
-जगपाल ठाकुर, सचिव नगर पंचायत
