
केलांग। चिनाव बेसिन पर आवंटित मेगा विद्युत परियोजनाओं पर राज्य सरकार पुनर्विचार कर सकती है। चिनाव नदी और इसकी सहायक नदी नालों पर प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर इस बार मुख्यमंत्री के सुर बदले-बदले नजर आए। प्रस्तावित परियोजनाओं के निर्माण से प्रकृति को संभावित व्यापक स्तर पर विनाश और विस्थापन के खिलाफ जन शिकायतें मिलने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दो टूक कहा कि परियोजनाओं की आड़ में हरे पेड़ों की बलि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिजली परियोजनाओं का निर्माण बांधों के बजाय रन ऑफ दा रिवर तकनीक पर करने की हिदायत दी। उदयपुर में सीएम की जनसभा के दौरान एसटी यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयराम ने प्रस्तावित परियोजनाओं के निर्माण से विस्थापन के साथ ही लाखों हरे पेड़ों की कटने की बात उठाई। मुख्यमंत्री ने केलांग में आयोजित जनसभा में इशारों में संकेत दिया कि राज्य सरकार चंद्रा-भागा और चिनाव वेसिन पर आवंटित विद्युत परियोजनाओं का जरूरत पड़ने पर फिर से रिव्यू के लिए विचार कर सकती है। लाहौल घाटी में चिनाव और इसकी सहायक नदी नालों पर राज्य सरकार ने करीब 3000 मेगावाट बिजली उत्पादन कर लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। वन विभाग के आंकडे़ बताते हैं कि चिनाव पर बनने वाली महज एक परियोजना के निर्माण में करीब 57 हजार हरे पेड़ों काटा जाएगा, जबकि कई परिवार विस्थापित होंगे। इसका ग्रामीणों कड़ा विरोध कर रहे हैं। हालांकि इसी साल मई माह में लाहौल दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं का विरोध कर रहे संगठनों और नेताओं को फटकार लगाई थी, लेकिन इस दौरे में परियोजनाओं को लेकर उनका मिजाज बदला-बदला नजर आया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद परियोजना प्रबंधनों की मुश्किलें जरूर बढ़ गई है। उधर, शैली संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट सुदर्शन ठाकुर और पूर्व टीएसी मेंबर ध्यान सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री के इस बयान का स्वागत किया है
