
ऊना। जिले में इन दिनों चल रही स्कूली खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे खिलाड़ियों के साथ भी पशुओं जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उनके साथ ऐसा व्यवहार करने वाले शिक्षक ही हैं, जो प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचाने के लिए उन्हें भेड़ बकरियों की तरह मालवाहक वाहनों में लाद कर ले जा रहे हैं, जबकि विभाग की ओर से नौनिहालों को इस तरह लाने ले जाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा रखा है और उन्हें केवल बसों में ही लाने और ले जाने की व्यवस्था दी गई है। इसके बावजूद शिक्षक विभाग के फरमानों को नजर अंदाज कर मनमर्जी करने पर उतारू हैं।
ऐसा ही वाक्या शनिवार को जिले के संतोषगढ़ रोड स्थित एक स्कूल में देखने को मिला, जहां स्कूली छात्रों को खेल प्रतियोगिता में ले जाने के लिए मालवाहक वाहन में भेड़ बकरियों की तरह ठूंसा जा रहा था। बच्चे कभी वाहन पर किसी तरह लटक रहे थे तो कोई कुछ कर रहा था। हालांकि उक्त वाहन में अकेले बच्चों को ही भेजा गया, जबकि शिक्षक उसके आगे पीछे निजी वाहनों पर जा रहे थे। मालवाहक वाहनों में यात्रियों को ढोए जाने और उनके हादसाग्रस्त होने की कितनी ही घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन इसके लिए पंजाब से आने वाले श्रद्धालुओं को तो कोसता है, लेकिन हिमाचल में कुछ पैसे बचाने के चक्कर में मासूमा की जान से हो रहे खिलवाड़ को देखकर सब आंखें मूंद लेते हैं। उधर, आरंभिक शिक्षा उपनिदेशक निर्मल रानी से इस संदर्भ में बताया कि सभी छात्रों को बसों में स्पर्धा स्थल तक लाने और वापस ले जाने के निर्देश दिए गए हैं, शनिवार को हुई घटना की जांच की जाएगी, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
