
सोलन। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले आपके बच्चे की अगर आंखें कमजोर हैं तो डाक्टर की सलाह पर आप बाजार से अपनी पसंद का चश्मा खरीद सकते हैं। बिल देने पर स्वास्थ्य विभाग आपको 400 रुपये की अदायगी करेगा। वहीं, गंभीर बीमारियों हृदय रोग, स्टोन, अस्थमा आदि का मुफ्त इलाज आईजीएमसी और टांडा में होगा। नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यह सब संभव होगा। कमजोर आंखों समेत विभिन्न बीमारी वाले बच्चों को स्कूल में मिशन की स्वास्थ्य टीम सर्वे के दौरान चिन्ह्ति करेगी।
इससे पहले यह व्यवस्था नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग टेंडर आमंत्रित करके चश्मे बनवाता था और बच्चों को बांटता था। टीम की सूचना पर गंभीर बीमारियों की रिपोर्ट सीएमओ या एमओएच स्तर के अधिकारी से तैयार करवाई जाएगी और केस रेफर होगा। योजना के तमाम लाभ पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलेंगे। इसकी पुष्टि सीएमओ सोलन डा. शशी पाल ने की है। बंदर, कुत्ते या स्नेक बाइट का भी मुफ्त इलाज होगा। इसके लिए अभिभावकों को स्कूल के प्रधानाचार्य से सर्टिफिकेट हासिल करके संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपना होगा। सारे इलाज का खर्चा एनआरएचएम के तहत उठाया जाएगा।
क्रिटिकल केयर कंपोनेंट में 29 बीमारी शामिल
स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम में क्रिटिकल केयर कंपोनेंट के तहत 29 गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। चिन्ह्ति केस का टांडा और आईजीएमसी में हृदय रोग, स्टोन, अस्थमा, डेंटल केयर, फ्रेक्चर, लीवर इंफेक्शन, सीवीएस, आरएचडी, आईईएमआई, ईएनटी इंफेक्शन, स्किन इंफेक्शन, विटामिन ए डी डेफिशियेंसी, मालन्यूट्रिशियन, माल डेफिशियेंसी, माइग्रेन आदि का मुफ्त इलाज होगा।
