दिग्गजों की चहलकदमी से चढ़ा सियासी पारा

ऊना। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में दिग्गजों की चहलकदमी से सियासी पारे में उछाल आ गया है। दिल्ली की गद्दी के निर्णायक 2014 के संग्राम के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार किया जा रहा है। सियासी हलचल बढ़ने के साथ-साथ संसदीय हलके में जुबानी जंग भी तेज हो गई है। विपक्ष में बैठी भाजपा अभ्यास वर्गों से कार्यकर्ताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ा रही है तो सत्तासीन कांग्रेस सम्मेलनों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को तैयार कर रही है। बसपा ने भी ग्रामीण स्तर पर बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। स्वां चैनेलाइेशन परियोजना के लिए 922 करोड़ की मंजूरी का श्रेय लेने के लिए भी कांग्रेस और भाजपा के नेता एक दूजे के खिलाफ आग उगलने लगे हैं। बाकायदा दस्तावेज दिखा दिखाकर इसे अपनी उपलब्धि बताया जा रहा है।अवैध खनन पर भी सियासत गरमाई हुई है। पिछले तीन चार दिनों से पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, अनुराग ठाकुर, भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती, पवन राणा, रणधीर शर्मा ऊना समेत संसदीय हलके के विभिन्न क्षेत्राें में डटे रहे। धूमल शनिवार को भी ऊना पहुंचे थे। उन्होंने कांग्रेस पर कई हमले किए। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद एवं संसदीय क्षेत्र के प्रभारी प्रो. चंद्र कुमार, ठाकुर राम लाल ने भी ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर पहुंचकर भाजपा पर सियासी हमला बोलते हुए सियासी आग में घी का काम कर डाला। ठाकुर राम लाल ने कई आरोप लगाते हुए धूमल, अनुराग अन्य नेताओं को भी घेरा। दो रोज पहले सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा की ऊना में राज्य हैंडबाल संघ के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी ने भी कई अटकलों को जन्म दे दिया। भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हमीरपुर से अनुराग पार्टी प्रत्याशी होंगे। शनिवार को धूमल ने भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस हर बार चेहरे बदलती है भाजपा नहीं। दूसरी ओर कांग्रेस से प्रत्याशी कौन होगा, यह अभी तय नहीं है।

कब कौन बने सांसद
हमीरपुर संसदीय सीट से धूमल 1989, 1991 और 2007 में चुनाव जीते। 1998 से लेकर इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है। 1998, 1999 और 2004 में सुरेश चंदेल सांसद बने। 2008 और 2009 में अनुराग लोस चुनाव जीते। 1996 में कांग्रेस के मेजर जनरल विक्रम सिंह ने धूमल को हराया। 1984 और 1980 में कांग्रेस के नारायण चंद सांसद बने।

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