
शिमला। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के दो गुटों में चली लड़ाई अब आम कर्मचारियों पर भारी पड़ने लगी है। सरकारी मान्यता से लेकर आफिस की जंग में कर्मचारी नेता पूरी तरह से उलझ गए हैं। राज्य कार्यकारिणी के चुनावों के बाद अब दोनों ही गुट अपने फेडरल हाउस करवाने की तैयारी में है। सरकारी मान्यता का फैसला दोनों ने ही सरकार पर छोड़ दिया है, महज राजनीतिक स्तर पर गोटियां फिट कर रहे हैं। मनकोटिया गुट के अध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा कि शीघ्र ही उनका फेडरल हाउस मंडी में होगा। इसमें कर्मचारियों की समस्याओं पर चरचा होगी। वहीं, जोगटा गुट के एसएस जोगटा ने कहा कि फेडरल हाउस में संयुक्त मांगपत्र तैयार कर सरकार को सौंपा जाएगा।
अभी तक कर्मचारियों की मांगें सरकार के समक्ष उठाने के लिए जेसीसी करवाने के लिए दोनों ही गुट मांग तो उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की बात मानने को तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री पहले ही दोनों गुटों को संकेत दे चुके हैं कि समझौता करके पहुंचे तो शीघ्र ही जेसीसी की जाएगी। बावजूद इसके दोनों ही गुटों में चली लड़ाई थमती नजर नहीं आ रही है। वर्तमान में दोनों गुट आपसी सहमति के बजाय महासंघ के कार्यालय को लेकर आमने सामने हैं। इसी मांग को लेकर जोगटा गुट मुख्य सचिव से मिले। इस दौरान भी महासंघ कार्यालय को काफी चरचा हुई।
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बौखलाहट में हैं जोगटा : सुनीता
शिमला। मनकोटिया गुट की प्रवक्ता सुनीता ठाकुर ने कहा कि एसएस जोगटा गुट बौखलाहट में अब त्यागपत्र देने की बात कर रहे हैं। एनजीओ का कार्यालय किसी का व्यक्तिगत नहीं है। उन्होंने कहा कि जोगटा गुट के नेता भी वहां आकर बैठक कर सकते हैं। यह कार्यालय कर्मचारियों का है। कर्मचारियों की समस्याओं के हल के लिए इसे बनाया है। उन्होंने जोगटा गुट के दस सितंबर तक के अल्टीमेटम पर कहा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले कैसे कर्मचारी नेता हो सकते हैं।
