बोट पर 45 मिनट का ‘मौत का सफर’

बंगाणा (ऊना)। गोबिंदसागर झील के लठियाणी-मंदली घाट पर बोट में ‘मौत का सफर’ हो रहा है। नियमों को ताक पर रखकर घाट के संचालक मनमर्जी से दोपहिया वाहन और यात्रियों को एक ही बोट में खचाखच भरकर ले जाते हैं। चंद पैसों की खातिर लोगों की मौत के साथ समझौता किया जा रहा है। हैरत की बात है कि इन बोटों में आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई सुरक्षा उपकरण भी नहीं है।

नियमों के मुताबिक यात्री और वाहन ढोने के लिए अलग-अलग बोट का होना जरूरी है। लठियाणी घाट पर इसके लिए दो अलग-अलग बोट मौजूद भी हैं। लेकिन, नियमों का पालन न करते हुए मल्लाह यात्रियों और वाहनों को एक ही बोट में भरकर 45 मिनट का खतरनाक सफर तय करते हैं। इनको रोकने या पूछने वाला कोई नहीं है? सवाल यह उठता है कि अगर घाट पर सफर कर रहे लोगों के साथ हजारों फीट गहरी झील के बीचों-बीच कोई अनहोनी हो जाती है तो उससे बचने के लिए घाट संचालकों के पास क्या साधन हैं। इस परिस्थिति में उस अनहोनी का जिम्मेदार कौन होगा?
स्थानीय लोगों प्रकाश, अमित कुमार, सुरेश कुमार, ज्ञान चंद, राजलाल, अमनदीप, किशोर कुमार, सुदर्शन कुमार, रोहित कुमार, जोधा मल, रमेश चंद, अर्जुन सिंह, लेखराज, जितेंद्र कुमार, रमन शर्मा, राजेश शर्मा, नितिन कुमार राजकुमार, सुनील कुमार, अजय शर्मा, पवन शर्मा, विजय कुमार, निर्मल कौशल, नरेश कुमार, विवेक कुमार, नरेंद्र पाठक, सुनील जोशी, रघुवीर सिंह, बलवीर सिंह, महेंद्र कुमार, अशोक कुमार, जगत राम, पंकज कुमार और सोनू कुमार ने आरोप लगाया कि कई बार मामले की शिकायत बंगाणा खंड के आला अधिकारियों को भी की गई लेकिन अधिकारियों ने भी कोई कार्रवाई न करते हुए घाट संचालकों को लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने के लिए खुली छूट दे रखी है।
बंगाणा के बीडीओ राज कंवर ने बताया कि घाट संचालकों को रजिस्टर नोटिस भेज दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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