
खरड़: खरड़ रेलवे स्टेशन के अधिकारियों में आज उस समय हड़कंप मच गया जब एडीशनल सैशन जज मोहाली मनजोत कौर के आदेश पर अदालत के अधिकारी शेर सिंह रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग, बैटरियां, कम्प्यूटर और फर्नीचर कुर्की के लिए स्टेशन मास्टर के पास पहुंचे।
अदालत की ओर से नियुक्त अधिकारी ने स्टेशन मास्टर बूटा सिंह को अदालत के आदेश की जानकारी देते हुए बताया कि गांव तोलेमाजरा के किसान रणधीर सिंह की जमीन रेलवे लाइन बनाने के लिए एक्वायर की गई थी लेकिन इसका पूरा मुआवजा नहीं दिया गया और रेलवे पर 18 लाख 90 हजार रुपए की राशि बकाया है।
अदालत ने इस मामले में रेलवे स्टेशन खरड़ की बिल्डिंग और रेलवे के कीमती सामान की कुर्की के आदेश दिए हैं। इससे घबराए स्टेशन मास्टर ने तुरंत रेलवे के उच्चाधिकारियों को सूचित किया। अदालत के अधिकारी ने स्टेशन मास्टर से कहा कि अदालती आदेश में खरड़ रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग, चार कमरे, 2 जैनरेटर, 30 बैटरियां, 20 कुर्सियां, 40 पंखे, 2 कम्प्यूटर, रेलवे का फर्नीचर आदि अदालत के सुपुर्द करने के लिए कहा गया है, ताकि जरूरत पडऩे पर इसकी नीलामी करके याची को उसकी रकम का भुगतान किया जा सके।
इस बीच, कुर्की की सूचना पाकर चंडीगढ़ से रेलवे पुलिस के अधिकारी खरड़ स्टेशन पर पहुंच गए और रेलवे के ए.ई.एन. परमिंदर सैनी एवं एक्सियन (कंस्ट्रक्शन) अमरजीत सिंह ने अदालत की तरफ से नियुक्त अधिकारी के साथ बातचीत की। रेलवे अधिकारियों ने मौके पर मौजूद याची गांव तोलेमाजरा के किसान रणधीर सिंह को अदालत में अगली सुनवाई की तिथि 26 अक्तूबर से पहले हर हाल में मुआवजे की बकाया रकम का भुगतान कर देने का आश्वासन दिया। तब खरड़ रेलवे स्टेशन पर आया कुर्की का संकट टाला जा सका।
किसान रणधीर सिंह ने बताया कि उन्होंने रेलवे से अपनी जमीन का बकाया मुआवजा लेने के लिए वर्ष 2007 में अदालत में याचिका दायर की थी। इस पर अदालत के आदेश के बावजूद न तो खरड़ के एस.डी.एम. दफ्तर ने कोई कार्रवाई की और न ही रेलवे के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।
