आजादपुर मंडी से कन्नी काट रहे बागवान

खराहल (कुल्लू)। सेब बागवानों का लोकल सब्जी मंडियों पर भरोसा बढ़ा है। दिल्ली की आजाद सब्जी मंडी के बजाय लोग कुल्लू की मंडियों में उत्पाद बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सेब सीजन के शुरुआती दौर से ही स्थानीय मंडियों में सेब दिल्ली मंडी की अपेक्षा अधिक बिका। बागवानों का कहना है कि दिल्ली सेब भेजने में खर्चा अधिक होता है तथा वहां के आढ़ति आठ फीसदी कमीशन भी काटते हैं। इस देखते हुए उन्होंने सेब लोकल मंडियों में ही बेचना उचित समझा। घाटी में इन दिनों सेब का सीजन यौवन पर है। कुल्लू के प्रगतिशील बागवान चमन ठाकुर, गुलाब सिंह, वीर सिंह, जयचंद ठाकुर, अखिल राणा, अनीश, सतीश ठाकुर और रघुवीर का कहना है कि आजादपुर सब्जी मंडी में बागवानों को आढ़तियों को आठ फीसदी कमीशन देनी पड़ती है। दिल्ली तक सेब पहुंचाने में किराया भी अधिक लगता है। इसके अलावा पैकिंग ढुलाई सहित 250 रुपये का अतिरिक्त खर्चा करना पड़ता है। उनके मुताबिक यहां की लोकल मंडियों में सेब बेचने से बागवानों का 200 रुपये का खर्चा बच जाता है।
स्थानीय मंडियों में सेब के दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। उच्च श्रेणी का सेब 35 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। कुल्लू पतलीकूहल, बंदरोल और भुंतर सब्जी मंडी में सेब सीजन जोरों पर है। स्थानीय मंडियों में बागवानों से कोई कमीशन नहीं ली जाती। कुल्लू एवं लाहौल स्पीति कृषि उपज समिति के सचिव प्रकाश कश्यप का कहना है कि प्रदेश की किसी भी सब्जी मंडी में बागवानों से कमीशन नहीं ली जाती।

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