
चंडीगढ़: पंजाब में अवैध माइनिंग की जांच के लिए भारत सरकार की भेजी गई 3 सदस्यीय केंद्रीय टीम ने प्रदेश की नदियों व नालों में व्यापक स्तर पर बेरोक-टोक व अनियंत्रित अवैध खनन के लिए पंजाब सरकार को दोषी ठहराया है। मंगलवार प्रात: चंडीगढ़ से दिल्ली लौट कर केंद्र सरकार को दी गई अपनी रिपोर्ट में टीम ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार अवैध खनन रोकथाम में न तो कोई दिलचस्पी ले रही है व न ही इस दिशा में कोई प्रयास कर रही है।
रीजनल डायरैक्टर मिनिस्ट्री ऑफ एन्वायरमैंट एंड फॉरैस्ट सुरिंद्र कुमार, डिप्टी डायरैक्टर मिनिस्ट्री ऑफ एन्वायरमैंट सोनू सिंह व डिप्टी कंट्रोलर इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स देहरादून जी.सी. मीना पर आधारित 3 सदस्यीय टीम ने गत दिवस पंजाब के रोपड़, नवांशहर व मोहाली जिलों में कई माइनिंग साइट्स पर अचानक छापेमारी की। जहां सैंड माफिया द्वारा रेत की खुलेआम लूट के कई सबूत मिले। टीम ने वीडियो भी बनाए।
अवैध खनन के सबूत मिटाने के प्रयास
टीम के आने की भनक मिलते ही डेराबस्सी तथा कई अन्य स्थानों पर अवैध खनन के सबूतों को मिटाने का पूरा प्रयास किया गया।टीम को मंगलवार पठानकोट जाना था लेकिन इसके टूर प्रोग्राम के मीडिया में लीक होने से वहां अवैध खनन सोमवार से ही बंद हो गया था और वाहन भी गायब हो गए थे। इस वजह से टीम ने पठानकोट जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया व दिल्ली चले गए।
पंजाब माइनिंग अधिकारियों पर भरोसा नहीं
टीम के साथ पंजाब सरकार के जिला माइनिंग अधिकारियों ने भी माइनिंग साइट्स का दौरा किया लेकिन केंद्रीय टीम ने अपने रूट के बारे में राज्य सरकार के अधिकारियों को नहीं बताया।दौरे के दौरान टीम ने कई बार रूट बदला व पूरा प्रयास किया कि वह कब, कहां, कैसे जा रहे हैं किसी को भी पता न चले।
