मछली पालन से किसानों को हो सकती है अच्छी आमदन: जिलाधीश

श्री मुक्तसर साहिब: मछली पालन विभाग द्वारा विशेष तौर पर सेम प्रभावित गांवों के किसानों के लिए मछली पालन के कार्य संबंधी सिखलाई देने के लिए 23 अगस्त को गांव अबुल खुराना में बने एकीकृत किसान सिखलाई केन्द्र के मछली पालन सिखलाई केन्द्र में विशेष सैमीनार आयोजित किया जा रहा है।

यह जानकारी जिलाधीश परमजीत सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस सैमीनार में गुरु अंगद देव वैटर्नरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों एवं मछली पालन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा सेम प्रभावित जमीनों में सफलता से मछली पालन के गुर बताए जाएंगे। उन्होंने किसानों को अधिक से अधिक संख्या में इस कार्य को अपनाने के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि मछली पालन द्वारा किसान प्रति एकड़ सवा लाख रुपए तक कमा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जिला श्री मुक्तसर साहिब सेम से प्रभावित है और बड़े रकबे में सेम के कारण जमीनें बेकार पड़ी हैं, जहां कोई फसल नहीं होती। ऐसी जमीनों में मछली पालन करके किसान अच्छी आमदन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नए छप्पड़ों की खुदाई के लिए जनरल कैटागरी के लिए 20 प्रतिशत सबसिडी तथा एस.सी.-एस.टी. कैटागरी के लिए 25 प्रतिशत सबसिडी प्रति हैक्टेयर दी जाती है।

इसी तरह पुराने छप्पड़ों के सुधार के लिए जनरल कैटागरी के किसानों को 20 प्रतिशत की दर से 15,000 रुपए एवं एस.सी./एस.टी. किसानों को 25 प्रतिशत सबसिडी की दर से 18,750 रुपए प्रति हैक्टेयर सबसिडी दी जाती है। इसी तरह मछली फीड प्रति यूनिट स्थापित करने के लिए 20 प्रतिशत की दर से 1. 50 लाख रुपए तक की सबसिडी दी जाती है। रंगदार मछलियों के लिए हैचरी स्थापित करने के लिए 10 प्रतिशत सबसिडी 1.50 लाख रुपए दी जाती है।

इस अवसर पर मछली पालन विभाग के सहायक डायरैक्टर डॉ. करण राठौड़ उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह सभी सुविधाएं लेने के लिए मछली पालन विभाग से सिखलाई लेनी आवश्यक है। सरकार द्वारा किसानों की बेहतरी के लिए जहां वार्षिक 5000 करोड़ रुपए की बिजली सबसिडी दी जा रही है, वहीं सरकार किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाने के लिए नई एवं आधुनिक मशीनों पर सबसिडी उपलब्ध करवा रही है।

गत तीन वर्षों में जिला श्री मुक्तसर साहिब में 78 लाख 9 हजार रुपए की सबसिडी किसानों को आधुनिक मशीनों की खरीद पर दी गई है। यह जानकारी जिले के उपायुक्त परमजीत सिंह आई.ए.एस. ने दी। इस अवसर पर जिला खेतीबाड़ी अधिकारी बेअंत सिंह भी उनके साथ उपस्थित थे। उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2010-11 दौरान 70 किसानों को रोटावेटर की खरीद के लिए 16 लाख 50 हजार रुपए की सबसिडी दी गई है।

इसी तरह 58 किसानों को सटराय रीपर की खरीद के लिए 11 लाख 59 हजार 200 रुपए की सबसिडी दी गई। 13 किसानों को 1,39,800 रुपए की सबसिडी जीरो टिलेज ड्रिल की खरीद के लिए एवं 34 किसानों को मल्टीक्रॉप प्लांटर की खरीद के लिए 5 लाख 10 हजार रुपए की सबसिडी दी गई। वर्ष 2011-12 दौरान 22 रोटावेटर के लिए 6,60,000 रुपए, जीरो टिलेज मशीन के लिए 20 किसानों को 3 लाख रुपए एवं 4 किसानों को लेजर लैंड लैवलर की खरीद के लिए 6 लाख रुपए की सबसिडी दी गई।

उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2012-13 दौरान 54 किसानों को 13 लाख रुपए की सबसिडी दी गई है। इसी तरह 32 किसानों को सटराय रीपर की खरीद के लिए 6 लाख 40 हजार रुपए की सबसिडी सरकार ने दी है। 26 किसानों को 3 लाख 55 हजार रुपए की सबसिडी दी गई है। 13 किसानों को सीड ड्रिल की खरीद के लिए 1,95,000 रुपए की सबसिडी दी गई है। इसके अतिरिक्त 2 किसानों को 3 लाख रुपए की सबसिडी लैजर लैवलर की खरीद के लिए सबसिडी प्रदान की है। इस अवसर पर जिला खेतीबाड़ी अधिकारी डॉ. सिंह ने कहा कि किसानों को खेती में आधुनिक मशीनों का उपयोग करना चाहिए। इसी तरह किसानों के लागत खर्चे कम होंगे, उपज एवं आमदन बढ़ती है।

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