जीतकर भी सोलन दुर्ग में पिछड़ी एनएसयूआई

जीतकर भी सोलन दुर्ग में पिछड़ी एनएसयूआई
सोलन। इसे कहते हैं सियासी अनिश्चितता। जिला सोलन में पिछली बार सियासी मैच को ड्रा तक पहुंचाने वाली एबीवीपी इस बार बैकफुट पर है। वहीं ड्रा के साथ खेल को आगे बढ़ाने के लिए उधेड़बुन करने वाली एनएसयूआई को जीत का स्वाद सोलन दुर्ग में शून्य हासिल करके चखना पड़ा है।
जिला छात्र संघ चुनावों में एनएसयूआई को सबसे बड़ी उपलब्धि नालागढ़ कालेज से मिली है। पिछली बार चारों सीटों पर कब्जा जमाने वाली एबीवीपी को यहां तीन सीटें खोकर मुंह की खानी पड़ी है। वहीं एनएसयूआई ने बड़ा उल्टफेर करते हुए तीन सीटों का फायदा उठाकर जीत की राह बनाई है। हालांकि संस्कृत कालेज और अर्की कालेज के चुनावी नतीजे पिछले वर्ष की भांती एक जैसे रहे हैं। यहां न तो किसी को नफा हुआ है न ही किसी को नुकसान।
दूसरी तरफ जिला भर में 14 सीटों का विनिंग आंकड़ा बनाने में सुबाथू कालेज ने अहम भूमिका निभाई है। पहली बार चुनावों में हिस्सा लेने वाले सुबाथू कालेज का पूरा पैनल एनएसयूआई का आया है। डायरेक्ट फायदा एनएसयूआई ने उठाया है। जिला भर में छात्र संघ चुनावों में एसएफआई को भी राहत मिली है। पहली बार सोलन से ओपनिंग करने में एसएफआई कामयाब रही है।

सोलन कालेज के लिए खुशी : लखनपाल
एबीवीपी के संगठन मंत्री अनुपम लखनपाल ने बताया कि छात्र संघ चुनावों के नतीजों पर समीक्षा होना जरूरी है। खुशी इस बात की है कि सोलन दुर्ग में एनएसयूआई का पत्ता साफ हुआ है। साख बचाने में एबीवीपी ने कामयाब रही है।

विरोधियों को करारा जवाब
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष छत्र सिंह ठाकुर ने कहा कि एनएसयूआई ने जीत का परचम लहराकर विरोधी छात्र संगठनों को करारा जवाब दिया है। यह जीत संगठन के कार्यकर्ताओं की है। विद्यार्थियों की समस्याओं को साथ लेकर आगे बढ़ना ही जीत का कारण है।

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