
केलांग। मयाड़ घाटी में आई बाढ़ से करपट गांव को खतरा पैदा हो गया है। दूसरी ओर बाढ़ में दो पुल और सड़क मार्ग टूटने से घाटी के नौ गांवों का संपर्क शेष दुनियां से कट चुका है। विधायक रवि ठाकुर ने सोमवार को बीआरओ तथा प्रशासन के अधिकारियों के साथ फिर चंगुट गांव का पैदल दौरा किया। बाढ़ के कारण करपट नाले का रुख गांव की तरफ मुड़ गया है। खतरे को भांपते हुए ग्रामीण घरों को छोड़ कर तंबुओं में रातें गुजारने को मजबूर हैं। बाढ़ के कारण मयाड़ घाटी में करोड़ों रुपये का हरा मटर खेतों में पड़ा है।
मयाड़ घाटी से लौटे विधायक रवि ठाकुर ने बताया कि बाढ़ के कारण मयाड़ के रूबलिंग, चंगुट, चुरपुट, तिंगरेट, गोंपा, उरगोस, अप्पर छालिंग, लोअर छालिंग, शुुग्टो और खंजर गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट चुका है। भयंकर बाढ़ के कारण इलाके के पांच सौ से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
रवि ठाकुर ने बताया कि खेतों में फंसे हरे मटर को मंडियों तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक सड़क मार्ग की व्यवस्था की जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हालात सामान्य बनाने के लिए जिला प्रशासन सेना की मदद ले रही है। प्रशासन मयाड़ घाटी में हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेगी। रही है। ठाकुर ने बताया कि हरे मटर के समय पर मंडियों तक नहीं पहुंचने पर राज्य सरकार से आपदा प्रबंधन के तहत प्रभावित किसानों को मटर का समर्थन मूल्य देने की मांग की जाएगी। मयाड़ घाटी के लिए यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लोनिवि चिनाब डिवीजन ने भी प्रयास तेज कर दिए हैं। लोनिवि के अधिशासी अभियंता हिमांशु विष्ट ने बताया कि बाढ़ में दो पुलों समेत करीब दो सौ मीटर सड़क मार्ग का हिस्सा बह गया है। इससे विभाग को करीब ढाई करोड़ का नुकसान हुआ है। तिंगरेट पंचायत की प्रधान सवित्री देवी ने बताया कि बाढ़ के बाद लोग दहशत के साये में जी रहे हैं।
