
कुल्लू। भाषा एवं संस्कृति विभाग और साहित्य कला संस्कृति अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में देवसदन में वीरवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के
मुख्य अतिथि जिला भाषा अधिकारी राजकुमार सकलानी रहे।
कार्यक्रम में जिला के नवोदित एवं वरिष्ठ कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। संगोष्ठी का आगाज वरिष्ठ लेखक कमलकांत शर्मा विद्रोही ने देशभक्ति कविता …ऐ नादान भारत की शान से की। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से देश में व्याप्त अफसरशाही एवं भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया। शिक्षाविद् सतीश चंद्र कौड़ा ने शिक्षा बिल पर आधारित कविता प्रस्तुत की। किशन श्रीमान ने अपनी रचना में भारतीय संस्कृति का नमूना पेश किया। उनकी अपनी कविता एक गमले ने कहा…नामक रचना प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। अमर चंद ने …शुणा भाई बेटे रखणे लाईया लोकगीत प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि हुकम राम ठाकुर ने …हमेशा पहाड़ पर दो बादलों का झगड़ा कविता पढ़ी। निर्मला ने पहाड़ी गीत …हाउली मेरी हाउली ऐ…, सूरत ठाकुर ने स्वतंत्रता, शेर सिंह मेरूपा ने उत्तराखंड त्रासदी, हीरा लाल ठाकुर ने मेला, शिव सिंह पाल ने महंगाई, शिक्षाविद् सत्यपाल भटनागर ने सैनिक और बीना जंबाल ने देशभक्ति लोकगीत, शिवराज ने जनपद जीवन, संतोष कुमारी ने मेरी अरमान, सुनीता ने लुटेरों का दोष नहीं और शकुंतला ने खुशी शीर्षक से रचनाएं प्रस्तुत की। संगोष्ठी में अनूप राम, गुलाब सेन, उर्मिला, रेणू सरला चंबयाल और ईश्वरी दास भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर आथर्ज गिल्ड के संस्थापक जयदेव विद्रोही, वरिष्ठ लेखक नवल ठाकुर तथा संस्कृत विद्वान डा. ओम कुमार शर्मा मौजूद रहे।
