यू.पी. के दुर्गा शक्ति प्रकरण से पंजाब की अफसरशाही पर दबाव

जालंधर: उत्तर प्रदेश में खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाली आई.ए.एस. अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को अखिलेश सरकार द्वारा निलम्बित कर देने के बाद पंजाब की अफसरशाही पर भी दबाव काफी बढ़ा हुआ है। अफसरशाही में यह चर्चा चल रही है कि पंजाब में भी खनन माफिया काफी सक्रिय है, जिसे देखते हुए अधिकारियों को अब काफी सोच-समझ कर काम करना होगा।

अगर अखिलेश सरकार दुर्गा शक्ति के खिलाफ निलंबन जैसा कदम उठा सकती है तो ऐसा ही हश्र पंजाब में खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने वाले आई.ए.एस. अधिकारियों का भी हो सकता है। पंजाब में भी खनन माफिया की सत्ताधारी अकाली-भाजपा गठबंधन के नेताओं के साथ सांठगांठ है।

रेत माफिया पर कई अकाली नेताओं की प्रत्यक्ष तौर पर सांठगांठ के चर्चे भी राजनीतिक क्षेत्रों में सामने आ चुके हैं। राज्य में रेत व बजरी की प्राकृतिक रूप से कमी पैदा करके उसके दाम आसमान को छू रहे हैं। यह सब माफिया के इशारों पर हो रहा है। राज्य में रेत व बजरी की कमी नहीं है, परन्तु जिस तरह से इनके दाम बढ़ते जा रहे हैं, उससे निर्माण लागत काफी बढ़ चुकी है। यद्यपि राज्य सरकार ने कई और खड्डों को नीलाम करके रेत व बजरी के दाम गिराने की बातें कही थीं परन्तु अभी तक व्यावहारिक तौर पर स्थिति साफ नहीं हुई है तथा दाम अब भी आसमान छू रहे हैं।

अफसरशाही से जुड़े सूत्रों का मानना है कि अधिकारी काफी सोच-समझ कर कदम उठा रहे हैं। रेत माफिया की सरकार तक सीधी पहुंच होने के कारण वह कोई भी कदम शायद ही माफिया के खिलाफ उठाएं। दुर्गा शक्ति प्रकरण से पंजाब के रेत माफिया के हौसले और बढ़े हैं क्योंकि उसे लग रहा है कि उस पर कोई भी अधिकारी हाथ नहीं डालेगा।

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