
चंडीगढ़: मिड-डे मील के कांट्रैक्ट खेल में धोखाधड़ी भी हो रही है। बाकायदा सिटको के पूर्व मैनेजिंग डायरैक्टर के चचेरे भाई सुखबीर सिंह बीर ने मिड-डे मील कांट्रैक्ट के दौरान हुई धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को शिकायत तक दी है। अपनी शिकायत में सुखबीर सिंह बीर ने सैक्टर-47 के गवर्नमैंट मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल में मिड-डे मील बनाने वाली प्राइवेट फर्म राजीव एसोसिएट पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
सुखबीर सिंह बीर मोहाली में वी.एस.एस. कैटरर्स एंड होटल प्राइवेट लिमिटेड के मालिक हैं। बीर के मुताबिक उन्होंने इसी कंपनी के नाम पर वर्ष 2012-13 के दौरान शिवालिक व्यू में तैयार होने वाले मिड-डे मील के कांट्रैक्ट को लेकर आवेदन किया था।
इस दौरान उन्होंने ऑन लाइन टैंडर भरने वाले एक जानकार को 30 हजार रुपए ड्राफ्ट बनाने के लिए दिए थे क्योंकि मिड-डे मील का कांट्रैक्ट लेने के लिए यह राशि ई.एम.डी के तौर पर जमा करवानी थी।
टैंडर ओपन हुआ तो पता चला कि यह टैंडर वी.एस.एस. कैटरर्स एंड होटल प्राइवेट लिमिटेड को नहीं मिला है। उन्होंने तुरंत 30 हजार रुपए का ड्राफ्ट वापिस नहीं लिया क्योंकि वह अपने काम में बिजी हो गए। मई 2013 में उन्होंने सिटको के मैनेजिंग डायरैक्टर को पत्र लिखकर ड्राफ्ट वापिस करने की मांग की तो पता चला कि यह ड्राफ्ट अवनीश चौधरी नाम का व्यक्ति ले गया है।
जांच-पड़ताल की तो सामने आया कि अवनीश चौधरी राजीव एसोसिएट का कर्मचारी है। अवनीश ने सिटको से यह ड्राफ्ट 16 अक्तूबर 2012 को हासिल किया और 17 अक्तूबर 2012 को यह ड्राफ्ट सैक्टर-38 के पंजाब स्टेट काप्रेटिव बैंक के अकाऊंट में जमा भी करवा दिया। बैंक जाकर पता चला कि यह अकाऊंट राजीव एसोसिएट का है।
बीर ने अपनी शिकायत में इस धोखाधड़ी के साथ-साथ राजीव एसोसिएट और टैंडर भरने वाले के बीच सांठगांठ का भी आरोप लगाया है। बीर के मुताबिक राजीव एसोसिएट सांठगांठ के जरिए ही मिड-डे मील के कांट्रैक्ट हथियाने का खेल खेल रही है।
आरोप बेबुनियाद : राजीव एसोसिएट
राजीव एसोसिएट की मालकिन सुलोचना शर्मा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। सुलोचना शर्मा के मुताबिक वी.एस.एस. कैटरर्स एंड होटल प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सुखबीर सिंह बीर ने उनसे 30 हजार रुपए उधार मांगे थे। इस पर उन्होंने कारण पूछा तो बीर ने बताया कि उन्हें मिड-डे मील का टैंडर भरना है, जिसके लिए ड्राफ्ट बनवाना है।
उन्होंने बीर को कहा कि वह अपने अकाऊंट से ही ड्राफ्ट बनवाकर उनके पास भेज देती हैं। इसके बाद बीर ने 45 हजार रुपए भी उधार लिए, जिसे उन्होंने 3 बार चैक की शक्ल में बीर को दिए। बाद में बीर ने यह रुपए लौटाने से मना कर दिया। इस पर उन्होंने 30 हजार रुपए का वह ड्राफ्ट निकलवा लिया क्योंकि यह ड्राफ्ट उनके ही अकाऊंट से बना था, इसलिए कैश हो गया। जहां तक बात सांठगांठ की है तो सब कुछ ई-टैंडरिंग के जरिए हुआ है, ऐसे में सांठगांठ या धोखाधड़ी करके कांट्रैक्ट हथियाने का सवाल ही नहीं उठता।
