
भल्याणी (कुल्लू)। नेताओं की अनदेखी के चलते क्षेत्र के मतदाताआें ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल न कर दोनों प्रमुख दलों को एक तरह से चेतावनी दी है। यही नहीं बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए घातक भी है। लोगों की चुनाव के प्रति घटती रुचि को नेताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
मंडी लोस उपचुनाव में कुल्लू और लाहौल के कुछ गांवों ने जहां पूरी तरह चुनाव का बहिष्कार किया था वहीं कई गांवों में इक्का दुक्का लोगों ने ही वोट डाले थे। जिला मुख्यालय से सटी विकास से कोसों दूर खड़ी लगघाटी में अधिकांश मतदान केंद्रों पर महज 32 फीसदी पोलिंग हो पाई है।
खारगा गांव के 211 मतदाताओं में से महज 18, जठानी के 260 मतदाताओं में से महज 60, भल्याणी में 520 मतदाताओं में से 223 ने ही वोट डाले। खारका निवासी चुनी लाल और जठानी निवासी राम सिंह खान ने बताया कि उनके गांव में न तो पानी है न ही गांव सड़क सुविधा। भल्याणी निवासी दोतम राम, दयाराम और हिरदे राम ने बताया कि वर्ष 1977 में बजट में पड़ी भल्याणी सड़क का मुंह खोलने के लिए कोई भी दल तैयार नहीं है। चुनावी बेला में ही उन्हें नेता जी सड़क निर्माण को लेकर झलक दिखलाते हैं। ग्रामीणों ने चेताया कि अगर उनके गांव को मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई तो वह आगामी आम चुनावों में फिर से किसी भी दल को अपना मत नहीं देंगे। मलाणा गांव में 900 मतदाताओं में से महज 131 ने ही वोट डाले हैं।
