
नई टिहरी। सिंचाई विभाग के अधिकारियाें की लापरवाही सिरस गांव के काश्तकारों पर भारी पड़ रही है। अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली से काश्तकारों की 10 बीघा भूमि बंजर होेने की स्थिति में है। क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत न होने पर काश्तकार इस बार आलू की बुआई नहीं कर पाए है। अगले माह धान की रोपाई की भी उन्हें चिंता सताने लगी है।
सिरस गांव में सिंचाई सुविधा के लिए 2009 में माथामाती तोक से नहर का निर्माण किया गया। वर्ष 2010 की आपदा में यह नहर हेड पर लगभग 400 मीटर क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक वर्ष तक गांव के लोगों ने खेतों में सिंचाई के लिए जैसे तैसे पानी पहुंचा दिया था। लेकिन 2012 में बारिश से नहर का अधिकंाश भू-भाग दोबारा क्षतिग्रस्त हो चुका है। सिंचाई विभाग के अधिकारी मरम्मत के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही देते रहे। गांव के राम प्रसाद कोठारी, नरेश रतूड़ी, सुनील थपलियाल, संजय थपलियाल ने बताया कि नहर से करीब पांच सौ खेत सिंचित होते थे।
