पल्यूर हादसे का जिम्मेदार कौन ?

चंबा। पल्यूर हादसे ने विद्युत बोर्ड की कार्यप्रणाली की पोल खाल कर रख थी। इसके साथ ही यह सवाल भी जिला प्रशासन और सरकार के समक्ष खड़ा किया है कि इस हादसे के लिए जिम्मेवार कौन है। सामान्य सप्लाई के खंभे पर हाई टेंशन लाइन बड़ी तकनीकी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही है। इतना ही नहीं दशकों तक चलने वाले इंसूलेटर का टूटना भी सवालिया निशान लगा रहा है। उधर, जिला चंबा में आज भी कई गांव हैं, जहां ट्रांसफार्मर बदले नहीं जा सके हैं और पुराने ट्रांसफार्मरों से कई गांवों को रोशन किया जा रहा है। आए दिन यहां के ग्रामीण कभी बिजली के कई दिनों तक लगने वाले कटों से परेशान हैं, तो कहीं लो वोल्टेज से। जिलावासियों की इस पुकार को सरकार के कब्जे से बाहर किया गया विद्युत बोर्ड तो शायद सुन ही नहीं रहा है। ठेकदारी और मुनाफा वसूली का लिमिटेड बनने के बाद विद्युत बोर्ड से शायद ही कोई व्यक्ति खुश हो। पल्यूर वासी भी बाकी गांवों की तरह लंबे अर्से से विद्युत बोर्ड और सरकार को प्रस्ताव भेज कर खस्ताहाल विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग उठाते आ रहे थे। इनकी किसी ने नहीं सुनी। अब चार निर्दोष लोगों की बलि लेने के बाद प्रशासन भी सरका है और सरकार भी हिली है।
पल्यूर पंचायत की प्रधान सवीना बेगम और गुज्जर कल्याण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष हसनदीन ने बताया कि पंचायत की ओर से कई बार प्रस्ताव भेज कर यहां की विद्युत व्यवस्था को सुचारू करने की मांग की जाती रही है, मगर विद्युत बोर्ड और जिला प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को यहां के जर्जर ट्रांसफार्मरोें और लकड़ी के खंभों पर बेतरतीब झुलती विद्युत लाइनों के खतरे की जानकारी तो थी, मगर यह नहीं पता था कि सामान्य सप्लाई वाले खंभे पर ही बांधी गई हाई वोल्टेज लाइन से इतना बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी तकनीकी जानकारी तो बोर्ड के अधिकारियों को थी। लिहाजा इसके जिम्मेवार भी वे ही हैं।

तकनीकी गड़बड़ी की जांच हो
ग्रामीणों प्रकाश चंद, मनोज कुमार, पंचायत समिति सदस्य ओम प्रकाश, पूर्व उपप्रधान लयाक मोहम्मद ने बताया कि विद्युत बोर्ड पूरी तरह ठेकेदारी प्रथा पर निर्भर हो गया है। अधिकारी ठेके देने के अलावा बाकी कुछ नहीं देखते। ठेकेदार लाइनें कैसे बिछा रहे हैं, इनकी सही मरम्मत हो रही है कि नहीं, किसी को नहीं पता। इतना ही नहीं बोर्ड के कर्मचारी भी कई सालों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं। उन्हें ग्रामीणों की दिक्कत की कोई परवाह नहीं, जब भी दिक्कत बताएं तो त्वरित कार्यवाही नहीं होती। उन्हें एक जगह जमे रहने के कारण किसी की परवाह नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से विद्युत बोर्ड की कार्यप्रणाली की समीक्षा के साथ-साथ ठेकेदारी प्रथा के कारण मिलीभगत से हो रही तकनीकी गड़बड़ियों की जांच करवाने की मांग की है।

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