सैलानियों के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं

कुल्लू। पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकारी दावे कितने सच हैं, यह देवभूमि कुल्लू के पर्यटन स्थलों की हालत से साफ बयां होता है। घाटी में कई ऐसे अनछुए पर्यटन स्थल हैं, जहां न तो सड़के हैं और न ही सैलानियों के ठहरने की मूलभूत सुविधा। ऐसे पर्यटन स्थलों लांबालांबरी, सरयोलसर, रघुपुरगढ़, टकरासी तथा शुश आदि शामिल हैं। देवदार, खरसू तथा कायल के घने जंगलों के बीचोंबीच बसे ये पर्यटन स्थल कुदरती सुंदरता से लबालब हैं। पर्यटन स्थलों की खूबसूरती और यहां की मनमोहक वादियां सैलानियों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करती हैं, लेकिन ये अनछुए पर्यटन स्थल न तो सड़क जैसी सुविधा से जुड़े हैं और न ही यहां पर सैलानियों के ठहरने के लिए कोई हट, विश्राम गृह या होटल हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मूलभूत जैसी सुविधाओं के न होने से पर्यटक इन स्थलों का सैर सपाटा कैसे कर पाएंगे। खनाग पंचायत प्रधान मंगत राम कारदार, पूर्व बीडीसी चेयरमैन प्रेम साहसी, प्रधान उर्मिला ठाकुर, गोविंद ठाकुर, दलीप सिंह तथा तेज राम ठाकुर का कहना है कि पर्यटन के विकास तथा पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए सड़क का होना अति आवश्यक है। इसके अलावा सैलानियों के ठहरने की सुविधा का भी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनावी वेला पर नेता जहां पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करते हैं। टूरिज्म विभाग भी पर्यटन को बढ़ावा देने के कई दावे करता आया है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी सिफर है।

Related posts