सेब से महंगी है क्रिमसन नाशपाती

खराहल (कुल्लू)। कुल्लू घाटी के बागवान यूरोपियन नाशपाती के दीवाने हो गए हैं। बागवान आजकल बागीचों को संवारने में जुटे हैं। इसके साथ ही बागवान नाशपाती की विभिन्न किस्मों की कलमें भी लगा रहे हैं। इसमें यूरोपियन किस्म की नाशपाती स्टार क्रिमसन बागवानों की पहली पसंद बनी हुई है। बने भी क्यों न इस नाशपाती की खासियत ही ऐसी है की हर कोई बागवान इसे अपने बागीचे की शोभा बनाना चाहता है।
सेब सीजन में इसका रेट कई बार सेब से अधिक रहता है। यह अधिक समय तक तरोताजा भी रहती है। फल चोखा होने केे साथ स्टार क्रिमसन का स्वाद भी लाजवाब है। मार्केट में भी यह नाशपाती हाथों हाथ बिक जाती है। बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा में इसके पौधे बागवानों को मुहैया करवाए जा रहे हैं।
बागवान ज्ञान ठाकुर, देवेंद्र, जय चंद, रोशन, गोपाल राणा तथा चंदे राम ठाकुर ने कहा कि पिछले साल दिल्ली की सब्जी मंडी में यूरोपियन स्टार क्रिमसन नाशपाती की पेटी दो हजार रुपये प्रति बाक्स बिकी है। बागवान अनुसंधान केंद्र बजौरा के सह निदेशक डा. जयंत कुमार ने बताया कि यह नाशपाती ज्यादा मीठी और टिकाऊ होती है। सेब की तरह लाल तथा रसीली है।

600 मीटर तक उत्पादन संभव : राणा
उद्यान विभाग के जिला उपनिदेशक बीसी राणा ने बताया कि इस नाशपाती का उत्पादन 600 से 1800 मीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में संभव है। इसके लिए 500 से 1500 घंटे के चिलिंग आवर्ज की ही जरूरत रहती है।

छह हजार मीट्रिक टन उत्पादन
प्रदेश में नाशपाती का उत्पादन 19वीं शताब्दी में शुरू हो गया था। लेकिन यूरोपियन नाशपाती की बैरायटी ने कुछ समय पहले ही दस्तक दी है। प्रदेश में करीब दस लाख टन नाशपाती का उत्पादन होता है। जिला कुल्लू में औसतन पांच से छह हजार मिट्रिक टन नाशपाती होती है। बंपर पैदावार होने पर यह आंकड़ा आगे भी निकल जाता है। उत्पादन का गढ़ माने जाने वाले खराहल घाटी में स्टार क्रिमसन नाशपाती के पौधे तैयार हो गए हैं।

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