लोकमित्र संचालकों की समस्या सुनो सरकार

भोरंज (हमीरपुर)। प्रदेश सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से करीब 5 वर्ष पूर्व सर्विस सेंटर एजेंसियों मार्फत श्ुारु किए लोकमित्र केंद्र प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत कुछ और है। एजेंसियाें ने प्रोजेक्ट को लेने के चक्कर में सरकार से नेगेटिव बीडिंग मंजूर कर केंद्राें में सुविधाएं देने की बात कही थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। हमीरपुर में लगभग 144 लोकमित्र केंद्र लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। शुरू में सर्विस सेंटर एजेंसियों ने लोकमित्र संचालक से 15-15 हजार बतौर लाइसेंस फीस के तौर पर लिए थे। बावजूद ब्लॉक स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति न हो सकी। जबकि, विभिन्न विभागों को सेवाएं प्रदान करने में लोकमित्र केंद्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जिला समन्वयक की एक रिपोर्ट के अनुसार हमीरपुर में 144 लोकमित्र केंद्रों की ओर से लगभग 8 करोड़ के बिजली बिल, 56 लाख के पानी के बिल, 529 निगम की बसों के टिकट, 53 लाख बीएसएनएल के बिल तथा 4622 नकल जमाबंदी के तौर पर लोगों को उपलब्ध करवाई गई है। केंद्रों के मार्फत लगभग 150 करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन हो चुकी है। सरकार की केंद्रों की तरफ बेरुखी से केंद्र संचालक आर्थिक हानि तथा मानसिक शोषण सहने को विवश हैं। भोरंज लोकमित्र केंद्र संचालक संघ के अध्यक्ष पंकज कुमार, सदस्य कुमारी पूनम, ओम सागर, राजेश कुमार, बनीता शर्मा, विजय कुमार, संजय, सुकेश वाला, सुखदेव, अजय, सरोज, श्याम कालिया, पवन, राकेश कुमारी, मोहिंद्र कुमार, रविंद्र, विकास, राजेश, निर्मला, हेमराज सभी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि लोकमित्र प्रोजेक्ट को लेकर विस के सत्र में चर्चा की जाए। संघ ने मांग उठाई कि सरकार प्रोजेक्ट को वित्तीय मदद प्रदान करे। ताकि, संचालकों को आर्थिक हानि तथा मानसिक परेशानी न उठानी पड़े।

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