लिफ्ट लेकर पकड़ी ‘मौत की बस’

आनी (कुल्लू)। बुधवार को कुल्लू से आनी की ओर आ रही निजी बस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर 40 से ज्यादा लोगों की मौत से जहां जिला और प्रदेश भर में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं आनी मेले में शरीक होने आ रहे दर्जन भर लोगों की मौत से आनी क्षेत्र में मातम छा गया।
बस में मौत का ग्रास बने आनी पंचायत के शाई गांव के कुल्लू में आईटीआई के छात्र राजेंद्र कुमार (22) की मौत से उसके बूढ़े बीमार दादा-दादी, पिता राज कुमार राजू, माता कृष्णा देवी और छोटी बहन समीक्षा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राज कुमार ने बताया कि घटना से तीन-चार रोज पहले ही बेटे ने उससे मेले में आने के लिए कपड़ों की खरीदारी की मांग रखी थी। इस पर पूरे परिवार का पालन-पोषण सिविल सोसाइटी डिपो के सेल्समैन के रूप में कर रहे राज कुमार ने मेले में आने से यह कह कर मना कर दिया था कि 14 मई को आने वाली संक्रांति के दिन वह खुद ही उसे मिलेंगे और कपड़े भी खरीदेंगे। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था और बस छूट जाने के बावजूद राजेंद्र कुमार ने लिफ्ट लेकर भुंतर के पास बस पकड़ कर उसमें बैठ गया। बस में चढ़ने के 15 मिनट बाद ही मौत ने उसे अन्य लोगों के साथ अपने आगोश में ले लिया। आसपास के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिन से राजकुमार दो माह बाद आईटीआई की परीक्षा समाप्त कर लौट रहे बेटे के इंतजार में आंखें बिछाए बैठा था, ताकि बेटा आए और उसके पारिवारिक बोझ को साझा कर सके।

बडारजान में एक साथ जलीं चार चिताएं
आनी (कुल्लू)। कुल्लू बस हादसे में उपमंडल आनी के अरसू के साथ बडारजान गांव के एक ही परिवार के जीवानंद पाठक पत्नी बलासू देवी और दो बेटियों जया और भावना की एक साथ चिताएं जलाई गईं। इस मौके पर पूरा क्षेत्र गमगीन हो गया।
इस दिल दहला देने वाली घटना में कुल्लू के बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत जीवानंद अपनी आईजीएमसी शिमला से कुछ वर्षों पूर्व रिटायर्ड हो चुकी पत्नी और एमए की पढ़ाई कर रही दो बेटियों के साथ आनी मेला देखने आ रहे थे। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि जिस बस में वे लोग सवार हैं, वे उन्हें मौत के द्वार पर ले जा रही है। इससे पहले पूरा परिवार आनी पहुंचा पाता बस नगवाईं के पास नदी में जा गिरी और पूरा परिवार मौत की गोद में सो गया। वीरवार सुबह सुबह चार शव गांव में पहुंचते ही चीख पुकार का माहौल हो गया। हादसे का शिकार जीवानंद के परिवार में अब उसकी दो विवाहित बेटियां बची हैं, जिनका रो-रो कर बुरा हाल है। गांव में एक साथ सजी चार चिताओं को जीवानंद के भतीजे ने आग दी।

Related posts