
ऊना। पोलियां बीत इलाके में हुए चर्चित महंत सिंगारा राम मर्डर केस में स्टेट सीआईडी के हाथ अभी तक कुछ नहीं लगा है। वारदात की जांच कर रही ऊना पुलिस के हाथ खड़े होने के बाद केस स्टेट सीआईडी को जुलाई 2012 में ट्रांसफर किया गया था। 12 जुलाई को जांच के लिए शिमला से सीआईडी की टीम ऊना पहुंची। इसके बाद दस महीनों में टीम ने ऊना के कई चक्कर काटे लेकिन हाथ कुछ भी नहीं लगा।
12 जुलाई 2012 को डीएसपी विजय शर्मा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जांच तो शुरू की लेकिन ठोस साक्ष्य जुटाने में टीम नाकाम रही। जून 2012 में हुए इस मर्डर केस में पुलिस ने होशियारपुर पंजाब से एक अन्य डेरे के महंत सतपाल को गिरफ्तार कर किया था। पोलियां की एक महिला की भी इस मर्डर केस में गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि बाद में इन्हें जमानत पर रिहा किया गया था।
इसी मामले में पुलिस ने नंगल सलांगड़ी क्षेत्र से एक साध्वी को भी पूछताछ के लिए तलब किया था। इस साध्वी ने वारदात से जुड़े कई राज पुलिस के सामने खोल दिए थे। जब पुलिस इस साध्वी को गिरफ्तार करने नंगल सलांगड़ी क्षेत्र में जा रही थी तो सूचना मिली कि साध्वी ने जहरीला पदार्थ निगल लिया है। जहरीला पदार्थ गटकने से साध्वी की मौत हो गई थी और महंत मर्डर केस से जुड़े कई राज भी राज बनकर रह गए। इस घटना के बाद पुलिस के हाथ लगभग खाली ही रहे। बाद में महंत सिंगारा मर्डर केस की फाइल स्टेट सीआईडी को सौंपने के निर्देश हुए। अब स्टेट सीआईडी भी इस मर्डर केस में कुछ खास नहीं कर पाई है। अब धर्मशाला में जल्द ही सीआईडी में नए डीएसपी बद्री सिंह कार्यभार संभालेंगे। डीएसपी हेडक्वार्टर सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि इस हत्याकांड की जांच सीआईडी कर रही है।
क्या था मामला
जून 2012 में महंत सिंगारा राम की हत्या करने के बाद शव बड़े संदूक में छिपाया गया था। शव के ऊपर तथा नीचे रजाइयां रखी गई थीं। पुलिस और स्टेट सीआईडी के लिए पोलियां बीत स्थित डेरे में हुई यह सनसनीखेज वारदात नासूर बनकर रह गई है।
