
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को मजेदार बनाने के लिए दशहरा उत्सव समिति ने कमर कस ली है। देवी-देवताओं के महाकुंभ इस उत्सव में इस बार बेसुरे कलाकार प्रस्तुतियां नहीं दे पाएंगे। जजों के माध्यम से पास कलाकार को ही अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का मंच मिल पाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम ऐतिहासिक लालचंद्र प्रार्थी कलाकेंद्र में होंगे। समिति इस कोशिश में है कि किसी भी सिफारिशी कलाकार को शामिल न किया जाए। मंच की गरिमा और दर्शकों की हर साल मिलती शिकायतों के बाद समिति ने इस बार कलाकारों की चयन प्रक्रिया में बदलाव किया है। 14 से 20 अक्तूबर तक चलने वाले दशहरा उत्सव की सांस्कृतिक संध्याओं में जो भी कलाकार मंच पर आएगा, उसे एक तो कार्यक्रम पेश करने का पूरा मौका मिलेगा दूसरा दर्शकों का भी मनोरंजन होगा। दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं डीसी राकेश कंवर ने इसकी पुष्टि की है। इस प्रस्ताव को दशहरा उत्सव की बैठक में पास कर दिया है। पहले शिकायतें मिलती रही हैं कि राजनेताओं की सिफारिश पर कलाकारों को मंच प्रदान किया जाता है।
बेसुरों पर खर्च किए थे डेढ़ लाख
दशहरा उत्सव के आंकड़ों के मुताबिक बीते दशहरा उत्सव में बेसुरे और सिफारिशी कलाकारों पर करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च किए गए थे। जानकारी के अनुसार इस दौरान 150 से अधिक कलाकारों को मंच प्रदान किया गया था। इसमें कुछ सिफारिश या फिर एक ही संस्था के कलाकार थे।
एक गाना सिर्फ एक बार
इस बार दशहरा उत्सव के दौरान कोई भी कलाकार एक गाने को फिर से नहीं गा सकेगा। किसी कलाकार ने कोई गाना पेश कर दिया है तो दूसरा कलाकार उसे नहीं
गा सकता।
स्वर परीक्षा से गुजरना होगा
दशहरा उत्सव का स्तर बेहतर और शानदार हो इसके लिए समिति ने बाकायदा एक प्रस्ताव पास किया है। इसमें खासकर न तो सिफारिशी और न ही बेसुरे कलाकारों को मंच मिलेगा। जो कलाकार कार्यक्रम देना चाहता है, उसे पहले स्वर परीक्षा से गुजरना होगा।
राकेश कंवर अध्यक्ष उत्सव समिति कुल्लू
