
आनी (कुल्लू)। हौसला बुलंद हो तो क्या नहीं हो सकता। ऐसा ही एक उदाहरण है ननखड़ी खंड के लैलन गांव का। जहां एक औरत अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की चाह में खच्चर पालकर कमाई कर रही है। औरत होकर एक मर्द का कार्य करने वाली इस हिम्मत वाली औरत को देख स्थानीय ग्रामीणों में भी नई उमंग का संचार हुआ है।
38 वर्षीय लीलमा देवी के पति मिस्त्री का काम करते हैं। अपने पति के कार्य से जो कमाई होती है उससे घर का गुजारा तो चलता है पर दो बच्चों की पढ़ाई लिखाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में लीलमा खच्चर पाल कर अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की ठानी है। सुबह शाम लीलमा देवी घर का काम करती है तो दिन को वह खच्चर पर सामान की ढुलाई कर रही है। इन दिनों लीलमा देवी ने लैलन गांव के कथानीया देवता और हाटेश्वरी माता के संयुक्त मंदिर के जीणोद्धार के लिए बजरी, सीमेंट और रेता की ढुलाई का ठेका ले रखा है। लीलमा देवी के कठिन प्रयासों से मंदिर का निर्माण कार्य भी बिना परेशानी के पूरा हो रहा है। लीलमा ने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हो और मंजिल नेक हो तो कोई भी कठिनाई बाधा नहीं डाल सकती। कई लोग भीख मांग कर अपने पेट का भरण पोषण करते हैं। उन्हें इस मां ने सीख दी है कि मेहनत से न पेट भूखा रहता है, बल्कि मंजिलों को भी हासिल कर सकते हैं।
