
पपरोला (कांगड़ा)। घाटी की लाइफलाइन कहलाने वाली पठानकोट-जोगिंद्रनगर तक चलने वाली रेल सेवा भारी बारिश के चलते कई दिन से ठप है। रेल सेवा पर बरसात ने भारी कहर बरपाया है। बीते एक माह से रेल सेवाएं बाधित हैं।
जुलाई माह में कांगड़ा के पास कोपरलाहड़ में हुए भूस्खलन के बाद से पठानकोट के लिए रेल सेवा बंद है। वहीं बीते 6 अगस्त से बैजनाथ-पपरोला से कोपरलाहड़ और जोगिंद्रनगर तक चलने वाली रेल सेवा बंद है। बीते 2 दिन में कांगड़ा से आगे लूनसु व गुलेर के बीच हुए भारी भूस्खलन के चलते रेल सेवा अब पठानकोट से गुलेर तक सिमट कर रह गई है। इससे कांगड़ा घाटी में रोजाना रेल में सफर करने वाले हजारों यात्री परेशान हैं। दूसरी ओर रेल विभाग लगातार जारी बरसात के चलते रेलमार्ग पर हो रहे भूस्खलन को देखते हुए अभी रेलगाड़ियों के संचालन का जोखिम मोल नहीं लेना चाहता। पिछले वर्ष भी कांगड़ा घाटी की लाइफलाइन पूरे सात माह के बाद बहाल हो पाई थी। जिसके चलते रेल यात्रियों को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा था। रेलवे सूत्रों के अनुसार जोगिंद्रनगर से गुलेर तक जगह-जगह भूस्खलन से क्षतिग्रस्त रेलमार्ग की मरम्मत के लिए रेल सेवा को फिलहाल स्थगित किया गया है। रेलवे के एसएसई (रेल ट्रैक) कुलदीप सिंह ने कहा कि मरम्मत कार्य पूरा होने व मौसम साफ होने पर ही रेलगाड़ियां बहाल करने के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
कहां-कहां हुआ भूस्खलन
164 किलोमीटर लंबे जोगिंद्रनगर-पठानकोट रेलमार्ग पर बैजनाथ मंदिर व पपरोला स्टेशन और समलोटी से कांगड़ा के बीच रेलमार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। इसके अलावा मझैरन के पास और परौर के आगे भी पहाड़ी से मलबा गिर रहा है।
कब-कब बाधित हुआ रेलमार्ग-
7 जुलाई : कोपरलाहड़ में भूस्खलन के चलते रेलमार्ग बाधित।
19 जुलाई : कोपरलाहड़ में ल्हासा गिरने से रेलमार्ग फिर बंद।
24 जुलाई : चौंतड़ा के पास पुली धंसने से जोगिंद्रनगर रेलमार्ग बंद।
6 अगस्त : बैजनाथ-पपरोला से कांगड़ा तक भूस्खलन से रेल सेवा ठप।
10 अगस्त : लुनसू व त्रिपल के बीच भूस्खलन से रेलमार्ग बंद।
