
कुल्लू। पर्यटन के लिए देश-विदेश में विख्यात कुल्लू घाटी में सालाना लाखों टूरिस्ट सैरसपाटे के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, जिले में गिने-चुने पर्यटन स्थलों को छोड़ दिया जाए तो 90 फीसदी स्थल ऐसे हैं जो कई मूलभूत सुविधाओं के अभाव में विकसित नहीं हो पाए हैं। सरकार, प्रशासन तथा पर्यटन विभाग की अनदेखी का शिकार ये पर्यटक स्थल आजादी के बाद भी विकसित नहीं हो सके हैं। घाटी में सालाना लाखों की तादाद में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में इन पर्यटक स्थलों का स्तर पर भी गिरता जा रहा है। इसमें जिला के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रा भी इसी का दंश झेल रहा है। जलोड़ी में न तो पीने के पानी की सुविधा है और न ही बिजली की। इतना ही नहीं, 91 साल पूर्व 1923 को सड़क सुविधा से जुड़ा इस पर्यटन स्थल में सैलानियों के ठहरने के लिए एक अदद रेस्ट हाउस तक नहीं हैं।
ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां का पर्यटन उद्योग कैसे आगे बढ़ पाएगा। बसेरा, पानी और बिजली जैसी आवश्यक जरूरतों का न होना सबसे हैरान करने वाला है। इनको लेकर किए गए सारे दावे और वायदे मात्र कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं। भले ही आईपीएच बंजार ने सालों पूर्व पाइप लाइन बिछा दी है, लेकिन यहां लगे नल मात्र शोपीस बने हैं। यहां कारोबारियों को टैक्सियों व बस से मीलों दूर खनाग और बड़ानानला से पानी ढोना पड़ रहा है। कारोबारी मोहर सिंह, जय प्रकाश तथा दिलीप सिंह का कहना है कि चुनाव के समय विभिन्न दलों के नेता दर्रे पर बिजली और पानी देने के बड़े-बड़े दावे करते रहे हैं, लेकिन सियासी पारी खेलने के बाद जिक्र तक नहीं होता। इसके चलते यहां के साथ लगते अन्य पर्यटन स्थल सोझा, रघुपुरगढ़, सरयोलसर, टकरासी बंगला तथा पनेऊ आदि स्थल भी पर्यटकों की पहुंच से दूर हैं। उन्होंने कहा कि समर सीजन शुरू हो गया है और यहां देशी-विदेशी पर्यटकों का पहुंचना शुरू हो गया है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं न होने से सैलानी यहां नहीं रुक पाते हैं।
