नौकरशाही की फाइलों में दबी सड़कें

कोट ब्लाक से कोटा गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वर्ष 2011 में उमरासू-नकोट-मकलोड़ी मोटर मार्ग से कोटा तक सड़क स्वीकृत हुई थी। वन अधिनियम में फंसी यह सड़क डीएफओ स्तर पर लंबित है। सड़क न बनने के कारण कोटा के ग्रामीण सड़क तक पहुंचते के लिए डेढ़ किमी पैदल चल रहे हैं।

केस संख्या-दो
-पाबौ ब्लाक के कुल्याणी गांव को जोड़ने के लिए वर्ष जुलाई 2010 में स्वीकृत हुई थी। वन अधिनियम में फंसी यह सड़क अभी तक डीएफओ स्तर पर लंबित है। सड़क न बनने से कुल्याणी गांव के लोगों को गाड़ी पकड़ने के लिए चार से पांच किमी पैदल नापना पड़ रहा है।

पौड़ी। गढ़वाल मंडल में नौकरशाही लंबित सड़कों को अपनी फाइलों में ही दबाने से बाज नहीं आ रही है। मंडल में लोनिवि 1249 सड़कों के लंबित मामलों को नौकरशाही अपने पास ही दबाए बैठी है। अधिकारियों का यह रवैया सड़कों के निर्माण, सड़क की समस्या से जूझ रहे लोगों को यातायात से जोड़ने में रोड़ा बना हुआ है।
मंडल में वन अधिनियम व अन्य कारणों लंबित सड़कों में मात्र पांच फीसदी सड़कें ऐसी है जो भारत सरकार, नोडल और न्यायालय स्तर अटकी हुई है। बाकी सड़कों को प्रशासन, वन विभाग के अधिकारी और लोनिवि के अधिकारी अपने स्तर पर दबाए हुए हैं। गढवाल मंडल में लोनिवि की 4216 स्वीकृत सड़कों में से 1473 सड़कों में वन अधिनियम समेत विभिन्न कारणों से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इनमें से 65 सड़कों के निर्माण के लिए सैद्धांतिक, 84 में विधिवत स्वीकृति मिल गई है। 1324 सड़केें विभिन्न स्तरों पर उलझी है। इनमें से 45 सड़कें भारत सरकार स्तर पर, 29 सड़कें नोडल स्तर पर और एक सड़क न्यायालय स्तर पर लंबित चल रही हैं। लेकिन बाकी की 1249 सड़कें ऐसी हैं जो प्रशासन, वन विभाग, लोनिवि के विभिन्न स्तरों पर अटकी हुई है। इनमें कई सड़कों को वन अधिनियम में फंसे लंबा समय हो गया है। इनके निस्ताण के लिए ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यह लापरवाही सड़कों के निर्माण में भारी पड़ रही है। जबकि पिछले साल शासन और सरकार की तरफ से अधिकारियों को कई बार लंबित मामलों को अपने स्तर से शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए गए थे।
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सर्वेक्षण स्तर पर लंबित हैं सर्वाधिक सड़कें
पौड़ी। लोनिवि के अनुसार मंडल में वन अधिनियम के कारण लंबित 1324 सड़कों में सर्वाधक 321 सड़कें सर्वेक्षण स्तर पर लंबित है। खंड स्तर पर 154, समरेखण विवाद में 91, डीएम स्तर पर 15, डीएफओ स्तर पर 48, मुख्य वन संरक्षक स्तर पर 30, मृग विहार स्तर पर चार, छपान स्तर पर सात, कटान स्तर पर तीन और अन्य कारणों से 263 सड़कें लंबित है। इसके अलावा 29 सड़कें नोडल अधिकारी स्तर पर, 45 भारत सरकार स्तर पर और एक न्यायालय स्तर पर लंबित है। 313 में निविदा आमंत्रित होनी है।
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‘‘वन अधिनियम से संबंधित मेरे स्तर पर कोई मामला लंबित नहीं है। लोनिवि ने गलत जानकारी दी हो। जिन मामलों को डीएफओ स्तर पर लंबित बताया गया है, हो सकता है प्रस्ताव अधूरे होने के कारण इन पर कार्यवाई नहीं हो पाई हो ’’
गंभीर सिंह मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल मंडल पौड़ी
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‘‘स्वीकृत सड़कों के लंबित प्रकरणों के निस्तारण में लंबी प्रक्रिया होकर गुजरना पड़ता है। कहीं सड़क को लेकर लोगों के बीच विवाद हो जाता है। जमीन हस्तांतरण के दौरान आपत्तियां आ जा जाती है। इन सभी कारणों से लंबित प्रकरणों को निस्तारित करने में काफी वक्त लग जाता है। ’’

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