
मंडी। नगर परिषद मंडी की ओर से एक जीवित महिला को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का मामला सामने आया है। परिषद की ओर से महिला को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को स्वयं नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ने सत्यापित किया है, जिसमें मृत्यु एवं पंजीकरण दोनों की तिथि एक ही दर्शाई गई है। नगर परिषद के कर्मचारियों ने टारना निवासी एक जीवित महिला को यह मृत्यु प्रमाण पत्र थमाया है।
जानकारी के मुताबिक अलका निवासी टारना ने जुलाई माह में जन्म प्रमाण पत्र के लिए नगर परिषद में अर्जी दी थी। नगर परिषद ने प्रमाण पत्र दे दिया। जब जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग पासपोर्ट बनाने के लिए किया गया तो अधिकारियों ने मृत महिला का पासपोर्ट बनाने से साफ इंकार कर दिया। परिजनों ने जब ध्यान दिया तो यह प्रमाण पत्र मृत्यु का पाया गया, जिसमें महिला की मृत्यु 21-09-1966 लिखी गई है, जबकि पंजीकरण की तिथि भी यही दर्शाई गई है। नगर परिषद की लापरवाही का कारनामा यही नहीं थमता। एक अन्य मामले में आईआरडीपी प्रमाण पत्र में नप की लापरवाही उजागर हुई है। जहां नप की लापरवाही के चलते प्रमाण पत्र की अवधि जारी करने से पहले ही खत्म हो जाती है। जानकारी के अनुसार दीवान चंद निवासी खलियार ने आईआरडीपी/बीपीएल प्रमाण पत्र के लिए नगर परिषद में अर्जी दी थी। जिस पर नगर परिषद की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया गया, मगर प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि 1-12-12 दर्शाई गई, जबकि अवधि समाप्त होने की तिथि 30-05-12 लिखी गई है। अब यह प्रमाण पत्र प्रार्थी के किसी भी काम नहीं आ रहा है।
नगर परिषद की लापरवाही पर मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। मोर्चा अध्यक्ष लक्ष्मेंद्र गुलेरिया का कहना है कि नगर परिषद में पहले भी कई ऐसे मामले उजागर हो चुके हैं। ऐसे में नगर परिषद को बर्खास्त कर शहर का जिम्मा जिलाधीश को सौंपा जाना चाहिए।
जन्म प्रमाण पत्र के लिए नगर परिषद में अर्जी दी थी, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र दिया गया है। जन्म प्रमाण पत्र न होने की सूरत में मेरी पत्नी का पासपोर्ट नहीं बन पाया है।
युगल किशोर पीड़िता का पति।
मामले में जांच पड़ताल की जाएगी। अगर गलत प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो उसे दुरुस्त कर दिया जाएगा।
केएल ठाकुर कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद मंडी।
