गर्भवतियों को लेकर तैयार होगा डाटा बेस

ऊना। जिले में लिंग अनुपात में बढ़ रहे अंतर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग चौकस हो गया है। एमसीटी (मदर-चाइल्ड ट्रेकर) से लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात पर लगाम लगाने की तैयारी है। हर गर्भ का पंजीकरण कर उसका फॉलोअप लिया जाएगा। प्रसूति तक पूरे मामले पर नजर रखी जाएगी। यदि बीच में गर्भपात होता है तो उसके कारणों से लेकर गर्भपात करवाने के स्थान तक का पूरा विवरण देना पड़ेगा। जिले के तमाम अल्ट्रासाउंड केंद्रों और क्लीनिकों पर पैनी निगाह रखी जाएगी। जिले में आधिकारिक तौर पर निजी क्षेत्र में चल रहे एकमात्र गर्भपात केंद्र की मान्यता रद होने के साथ ही उसका काम भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन इसके अतिरिक्त विभाग की नजरों से दूर अवैध रुप से चल रहे ऐसे केंद्रों का भी जल्द पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
प्रदेश के अतिरिक्त पंजाब के सीमांत कस्बों में हो रहे लिंग परीक्षणों और गर्भपात के धंधे पर इससे लगाम कसेगी। विभाग की ओर से एक उड़नदस्ते का गठन किया गया है। जिले में पंजीकृत गर्भ को पंजाब में गिराए जाने की सूरत में भी उड़नदस्ता पूरी कार्रवाई करने में सक्षम होगा। प्रदेश का ऊना जिला लिंग अनुपात के मामले में देश भर के टॉप 25 जिलों में शुमार हो चुका है। इसे देखते हुए विभाग ने कमर कस ली है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जीआर कौशल ने बताया कि विभाग एमसीटी के जरिये हर गर्भ पर नजर रखेगा। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे स्वास्थ्य उपकेंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक सभी जगह से गर्भवतियों का पंजीकरण किया जाएगा और उनके प्रसव तक पूरा फॉलोअप भी लिया जाएगा। इससे गर्भपात के मामले आसानी से ट्रेस होंगे।

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