किसी की बिना खाए चली गई जान….किसी ने खाया भी तो जहर..

देहरादून। पहाड़ों पर जल प्रलय में जान गंवाने वाले भूखे पेट ही दुनिया से चले गए। शवों के पोस्टमार्टम में कई के पेट खाली मिल रहे हैं। बहुत से शवों का तो अब पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाएगा। इनका हुलिया बिगड़ गया है। फोरेंसिक टीम इनका डीएनए सुरक्षित करके दाह संस्कार करवा देगी। अगर इनके अपने ढूंढते आएंगे भी तो पहचान के लिए डीएनए भर है। शवों को जलाया जाएगा। इसके लिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लकड़ियां भिजवाई जा रही हैं। शवों को गाड़ने और पानी में बहाने से दिक्कत पैदा हो सकती है।
केदारघाटी के गौरीकुंड में अभी तक सात शवों के पोस्टमार्टम हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि उनके पेट खाली निकले। जब मौत आई तो ये भूखे रहे होंगे। घाटी में पड़े अधिकांश शवों की स्थिति बिगड़ रही है, जिससे पोस्टमार्टम में दिक्कत होगी। ज्यादा से ज्यादा शवों के पोस्टमार्टम हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक टीम के स्थान पर पांच टीमें लगा दी हैं। टीमों में दून अस्पताल, कोरोनेशन, जौलीग्रांट और संयुक्त चिकित्सालय प्रेमनगर के डाक्टर शामिल हैं।
कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा.जेएस जोशी ने बताया कि सारे शवों का पोस्टमार्टम करने का मतलब नहीं रहेगा। शवों के निस्तारण के संबंध में टीम गठित कर दी गई है। इसमें एक फोरेंसिक मेडिसिन का विशेषज्ञ, एक डाक्टर, एक प्रशासनिक और पुलिस अफसर रहेगा। प्रत्येक शव से डीएनए सुरक्षित कर लिया जाएगा। इसके बाद शव को ‘डिस्पोजल’ कर दिया जाएगा। अगर कोई पहचान के लिए आएगा तो डीएनए टेस्टिंग से पहचान करके बता दिया जाएगा कि अमुक व्यक्ति की मौत हो गई है।

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