
ऊना। एक तरफ सोमवार को बैठक में उपायुक्त मासूम अर्शप्रीत की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कड़े निर्देश दे रहे थे कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। दूसरी ओर स्कूलों के बाहर सड़कों पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ रही थीं। इंडियन बुलेटिन की टीम सोमवार को बसों में अटेंडेंट और अन्य इंतजामों का जायजा लेने पहुंची।
स्कूलों से छुट्टी होने के इंतजार में बैठे स्कूली बसों और अन्य वाहनों के चालक स्कूल के मेन गेट की ओर टकटकी लगाए हुए थे। स्कूली बसों के अलावा अन्य वाहनों में स्कूल ड्यूटी वाला कोई भी बोर्ड नहीं था। स्कूल बसें और अन्य वाहन सड़क पर ही पार्क थे। कई स्कूलों के परिसर में इतनी जगह ही नहीं थी कि बच्चों को परिसर में ही वाहन पार्क करके उसमें बिठाया जा सके। छुट्टी होने के बाद बच्चे स्कूल बसों और अन्य वाहनों की ओर लपके। कई बच्चे सड़क पार करके उस वाहनों तक पहुंचे। इस दौरान सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ते अन्य वाहन भी ओपर स्पीड से निकल रहे थे। 13 से 16 साल के कई बच्चे अपनी स्कूटी पर सवार होकर घरों को जा रहे थे। एक स्कूटी पर तीन तीन नाबालिग जा रहे थे। इन बच्चों ने हेलमेट भी नहीं पहना था। स्कूल की एक बस में जब बस चालक से पूछा कि कंडक्टर कहां है। जवाब मिला कंडक्टर दूजे गेड़े ते आणा। हमने पूछा कोई अटेंडेंट नहीं है। जवाब मिला उसदी कोई लोड़ नी है। साहब कहंदे तनख्वाह किन्हे देणी। दो अन्य स्कूल बसों में भी इसी तरह के जवाब मिले। यह सब सोमवार को ऊना की सड़कों पर उस समय घट रहा था, जब स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर उपायुक्त अभिषेक जैन, अन्य अधिकारियों और निजी स्कूल प्रबंधकों के बीच मंथन चल रहा था।
छेती कर छेती यारा
दोपहर बाद ठीक 2.07 बजे एक आटो रिक्शा चालक स्कूल के बाहर बच्चों का इंतजार कर रहा था। जैसे ही बच्चे आए तो आटो को नौ बच्चों ने घेर लिया। आटो चालक बच्चों से कह रहा था कि छेती कर छेती। मैं सवारियां लैण बी जाणा।
क्या कहते हैं एसपी
ऊना के एसपी अनुपम शर्मा ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस प्रभारियों को इस दिशा में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
