भारत-चीन युद्ध के शहीदों को किया नमन

1962 के युद्ध में बिलासपुर के 13 जवानों ने पिया था शहादत का जाम
बिलासपुर : वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के दौरान शहादत का जाम पीने वाले जवानों की स्मृति में रविवार को बिलासपुर के चंगर सैक्टर स्थित शहीद स्मारक पर पूर्व सैनिक कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सैनिक संस्था प्रदेश संयोजक सूबेदार प्रकाश चंद, ब्रिगेडियर जेके शर्मा सहित कई पूर्व सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों व जिला बिलासपुर के गण्यमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की, साथ ही 2 मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मशांति के लिए प्रार्थना भी की। सूबेदार प्रकाश चंद ने कहा कि भारत-चीन युद्ध के दौरान बेहद कठिन परिस्थितियों में लड़ते हुए वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। देश ने इस युद्ध से सबक सीखा और सैन्य क्षमता को मजबूत कर आधारभूत ढांचे को विकसित किया।

आज की भारतीय सेना के साथ परिस्थितियां 1962 जैसी नहीं हैं। हमारी सेनाएं देश की एक-एक इंच की रक्षा करने में सक्षम हैं। सूबेदार प्रकाश चंद ने कहा कि आज हम 1962 के उन शहीदों को जिन्होंने आजादी के बाद भारत-चीन युद्ध में बिलासपुर का नाम रोशन किया था, को नमन करते हैं। सूबेदार प्रकाश चंद ने कहा कि अगर सरकारें पर्यावरण दिवस, बाल दिवस, महिला दिवस, नशा विरोधी दिवस, शिक्षा दिवस व अध्यापक दिवस का आयोजन करती हैं तो प्रदेश में युद्ध दिवस क्यों नहीं मनाया जाता। युद्ध दिवस मनाने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए लेकिन इसके साथ ही चिंता का विषय यह भी है कि शहीदों के परिवार भी युद्ध दिवस के मौके पर आने से परहेज करते हैं।

इस मौके पर ब्रिगेडियर जगदीश वर्मा, कैप्टन नरेंद्र सिंह, कैप्टन अमरनाथ धीमान, कैप्टन योगेंद्र जसवाल, कैप्टन राजेंद्र सिंह, कैप्टन अमरनाथ धीमान, कैप्टन जोगेंद्र सेन, कैप्टन योगेंद्र पाल, कैप्टन राय सिंह चंदेल, सूबेदार केयर सिंह, सूबेदार लश्करी राम, सूबेदार बालक राम, सूबेदार अमर सिंह धीमान, सूबेदार बालक राम, हवलदार लच्छू राम, शिव सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष रजनी शर्मा, राष्ट्रीय सैनिक संस्था महिला विंग की जिला उपाध्यक्ष रक्षा देवी, सचिव सुनंदा सूद, प्रेम लता, मीना कौशल, संतोष भारद्वाज, अरुण डोगरा, राज वर्मा व जयंत जैन उपस्थित थे।

33 दिन चला था युद्ध
भारत-चीन युद्ध 20 अक्तूबर से 21 नवम्बर तक 33 दिन चला था और इस युद्ध के दौरान सर्वप्रथम द्वितीय लैफ्टिनैंट टेक ङ्क्षसह चंदेल की अगुवाई में भारतीय सेना की टुकड़ी के साथ त्वांग नदी बामडीला नुकमाडोग में भारत-चीन का घमासान युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान 23 अक्तूबर, 1962 को लाइट मशीनगन की 5-6 गोलियां लैफ्टिनैंट टेक सिंह चंदेल के सीने को चीरती हुईं पार कर गईं। बिलासपुर जिला के गांव बडग़ांव के निवासी लैफ्टिनैंट टेक सिंह चंदेल के शहीद होने से इस युद्ध में शुरू हुआ हमारे वीर जवानों का मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने का सिलसिला जोकि आगे लगातार जारी रहा व बगठेरू के सिपाही हरवंश सिंह, मोरसिंघी गांव के सिपाही जीत सिंह, बरसंड गांव के सिपाही तारा सिंह, दोकडू गांव के हवलदार बहादुर सिंह, द्रबयाण के सिपाही किशन सिंह, बरोटा गांव के सिपाही भाग सिंह, गांव बिजौरा के सिपाही कृष्णु, गांव कुठेड़ा के दया राम, बल्ली गांव के गनर मुंशी राम, चुवाड़ी गांव के लैब धनी राम, निचली भटेड़ गांव के पनियर गोपाल व स्योथा गांव के सिपाही प्रेम चंद ने भारत-चीन युद्ध के दौरान अपने प्राण न्यौछावर किए। आज हम सब बिलासपुर के इन 13 शहीद सैनिकों को नमन करते हैं।

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