फाइलों में बंद होकर रह गई गई योजनाएं

बिलासपुर। औपचारिकताओं का फेर कहें या फिर लोगों में दिलचस्पी नहीं है। बागवानी तकनीकी मिशन के तहत बडे़ प्रोजेक्टों से ग्रामीणों ने किनारा कर लिया है। एक करोड़ रुपस् तक बडे़ प्रोजेक्टों को आवेदन नहीं आ रहे। ऐसे प्रोजेक्ट सरकार की फाइलों में बंद होकर रह गए हैं। जिला में कुछ अरसे पहले महज एक ही आवेदन आया था। जिसे स्वीकृत किया गया है। जिला में एक टिश्यू कल्चर लैब तैयार की गई है। जहां पर बाकायदा सेब की नर्सरियां तैयार कर प्रदेश के विभिन्न जिलों को सप्लाई भी किए जा रहे हैं।
बागवानी तकनीकी मिशन के तहत एक करोड़ रुपए के बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल है। इसके तहत कृषि या बागवानी पर आधारित लघु उद्योग, पैकिंग हाउस, टिश्यू कल्चर लैब, जूस-जैम आदि बनाने की फैक्टरी आदि का भी प्रावधान है। जिला के लोग इसमें रुचि नहीं दिखा रहे। खास यह है कि इसके लिए कोई सोसायटी यह सहकारी सभा भी आवेदन कर सकती है। प्रचार प्रसार का अभाव और जटिल औपचारिकताएं राह में रोड़ा बन रही है। आवेदन के लिए जमीन नाम पर होनी चाहिए। अकेला बागवान इतना बड़ा उद्योग लगाने में सक्षम नहीं है सोसाइटियों के आड़े जमीन है। सोसाइटियों के नाम जमीन का पंजीकरण करने में धारा 118 आडे़ आ रही है। ऐसे प्रोजेक्टों पर कोई हाथ मारने को तैयार नहीं है। विभागीय सूत्रों की मानें तो ऐसे प्रोजेक्टों के लिए अभी तक एक भी आवेदन नहीं आया है। महज एक ही आवेदन कुछ वर्ष पहले आया था। इसके तहत टिश्यू कल्चर लैब तैयार भी की गई है। इन योजनाओं के तहत बागवानों को 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है। उधर, बागवानी उप निदेशक ओपी चंदेल ने कहा कि अकेला बागवान इतने बडे़ प्रोजेक्ट का खर्चा नहीं उठा पाता। लिहाजा, ऐसे प्रोजेक्टों को अभी तक आवेदन नहीं आए हैं। कुछ अरसे पहले जो एक आवेदन आया था वह मंजूर भी हो गया है।

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