चीन के नापाक मंसूबों को जवाब देने की तैयारी’

नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने चीन की आक्रामक रणनीति का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए नई पलटन (कॉर्प्स) बनाने को मंजूरी दे दी है। यह पलटन माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के तौर पर चीन से सटी सीमा पर तैनात की जाएगी। रक्षा मंत्रालय के इस कदम से साफ है कि भारत चीन की तरफ से हाल ही में नए तरह के सैन्य संबंध बनाने की बात से सहमत नहीं है। हाल के दिनों में चीन ने भारत के साथ सैन्य संबंध सुधारने के लिए कई अच्छे बयान देने की कोशिश की है, लेकिन भारत का मानना है कि पूर्वी सीमा पर चीन अपनी बढ़ती सक्रियता को ढंकने के लिए इस तरह की बातें कर रहा है।

रक्षा मंत्रालय की योजना के मुताबिक नई पलटन में करीब 89 हजार जवान और 400 अफसर शामिल होंगे। नई पहाड़ी पलटन पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में बनेगी। इसमें दो और डिवीजन जोड़ी जाएंगी। पूर्वी भारत में चीन के ही खतरे के मद्देनजर पहले से ही दो डिवीजनों को खड़ा किया जा रहा है। नई पलटन में ब्रिगेड और एक आर्टिलरी डिवीजन शामिल होगी।

सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय का जोर इस बात पर है कि अगर चीन तिब्बत के आसपास ‘करगिल’ जैसी घुसपैठ करता है तो माउंटेन स्ट्राइक कॉप्र्स उसका मुंहतोड़ जवाब दे सके। चीन के बढ़ते खतरे के मद्देनजर नई पलटन बनाने की योजना पर 2010 से ही योजनाचल रहा था। 2011 में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दी थी। लेकिन 2012 में यह योजना तब खटाई में पड़ती दिखी,

जब इस प्रस्ताव को यह कहकर लौटा दिया गया था कि तीनों सेनाएं थल, वायु और नौसेना इस प्रस्ताव पर नए सिरे से विचार करें ताकि एक कॉमन प्लान तैयार किया जा सके। इसके बाद करीब छह महीने तक तीनों सेनाओं के प्रमुखों की समिति इस योजना पर विचार करती रही। सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव में वायु सेना से जुड़ी मामूली फेरबदल की जा रही है। इस परियोजना का पूरा खर्च भी पहले हुए आकलन से थोड़ा ज्यादा करीब 65 हजार करोड़ रुपये हो गया है।

Related posts