तांदी-जम्मू मार्ग बना लाहौल का सहारा

उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी के लिए हेलीकाप्टर की नियमित उड़ानें न होने से लोग तांदी-संसारी- जम्मू होते हुए पठानकोट के रास्ते घाटी से बाहर निकल रहे हैं। हेलीकाप्टर की सवारी में जहां लोग 1500 रुपये प्रति सीट में पहुंच जाते थे वहीं सड़क मार्ग द्वारा लोगों को 2500 रुपये प्रति सवारी खर्च करने पड़ रहे हैं। लोग टैक्सियों के जरिये लाहौल से जम्मू होते हुए घाटी से बाहर निकल रहे हैं। इस बार कुछ दिनों को छोड़कर लाहौल घाटी भारी बर्फबारी के बीच भी जम्मू से जुड़ी रही।
आजकल भी लाहौल घाटी के लोग रोहतांग दर्रा बंद होने और हेलीकाप्टर की नियमित उड़ान न होने से लाहौल-जम्मू मार्ग से ही घाटी से बाहर जा रहे हैं। हालांकि रोहतांग दर्रा 20 मार्च से पैदल राहगीरों के लिए खुल चुका है लेकिन अभी तक महज 18 लोगों ने ही रोहतांग को लांघा है। लोग रोहतांग दर्रे का खतरा नहीं उठाना चाहते।
स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार, विनोद कुमार, प्रेम सिंह और चमन लाल ने कहा कि सरकार की नजर तांदी जम्मू मार्ग पर मेहरबान हो जाए तो लाहौल घाटी के लोगों को इसी मार्ग से घाटी से बाहर निकलने में काफी राहत मिलेगी। डीसी वीर सिंह ठाकुर ने बताया कि रोहतांग दर्रा बंद होने पर तांदी-जम्मू मार्ग लोगों को यातायात में राहत दे रहा है। बताया कि इस मार्ग की हालत सुधारने को लेकर वे प्रदेश सरकार से बातचीत करेंगे।

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