बिना गुरु स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर

रोहडू। चिड़गांव तहसील के अंतर्गत सारी बासा पंचायत का राजकीय माध्यमिक स्कूल मंघारा चार वर्ष से मात्र दो पीटीए शिक्षकों के सहारे चल रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे स्कूल से पलायन करने लगे हैं। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या घटकर अब 17 पहुंच गई है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों के अभिभावक भी चिंतित हैं।
माध्यमिक स्कूल मंघारा में वर्ष 2009 से पूर्व ही विज्ञान स्नातक तथा कला स्नातक अध्यापक का तबादला हुआ था। तब से लेकर आज तक स्कूल में रिक्त पदों को नहीं भरा गया है। स्कूल में केवल एक शास्त्री तथा शारीरिक शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये दोनों शिक्षक भी पीटीए पर नियुक्त किए गए हैं। कला अध्यापक का पद तो स्कूल के स्तरोनन्त होने के समय से ही रिक्त है। स्कूल में माथला, जेईनाड़ी, चिवाड़ी, मंघारा तथा घरशाल गांव से बच्चे पढ़ने आते हैं। शिक्षकों के अभाव के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके चलते अभिभावक भी बच्चों को स्कूल में पढ़ाने से तौबा कर रहे हैं। हर साल बच्चे स्कूल से पलायन करने के लिए मजबूर हैं। पिछले वर्ष स्कूल में छात्रों की संख्या 35 थी, जो अब घटकर 17 रह गई है। ग्रामीण स्तर पर सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए सभी सरकारी दावे हवा हो गए हैं। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष बृज लाल, अभिभावक यशपाल, सुरेश कुमार, अमिता देवी, कांता देवी ने बताया कि स्कूल में शिक्षक मौजूद नहीं हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए कोई भी सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर स्कूल में शिक्षकाें के खाली पदों को नहीं भरा गया तो अभिभावक मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। स्कूल के कार्यवाहक मुख्य अध्यापक महेंद्र सिंह कामटा ने बताया कि चार वर्ष से स्कूल दो पीटीए शिक्षकों के सहारे है। बच्चे स्कूल छोड़कर जा रहे हैं। शिक्षकाें के पद रिक्त होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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