
शिमला। आरकेएमवी कालेज प्रशासन की दूरदर्शिता की कमी जनता के लाखों रुपये बर्बाद कर देगी। कालेज प्रशासन ने पिछले तीन साल में परिसर के पुराने जर्जर भवन में लाखों की राशि खर्च कर छात्राओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से लेस लैंग्वेज लैब, ई कॉमर्स लैब और आधुनिक सम्मेलन कक्ष का निर्माण करवाया। हैरत यह है कि इस भवन को गिराया जाना पहले से तय था। अगर इस भवन को पहले से गिराया जाना तय था तो सवाल उठता है कि इस पर करीब 70 लाख क्यों खर्च कर दिए गए।
इस जर्जर भवन को गिराकर ही कॉलेज के नए प्रशासनिक और कला संकाय ब्लॉक का निर्माण किया जाना था। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने पिछले कार्यकाल में 2007 में नए भवन की आधारशिला तक रख दी थी। इसके बाद एमसी ने भवन निर्माण के लिए कुछ आपत्तियां लगाईं। अब इसे लापरवाही कहेंगे कि उदासीन रवैया कि इन आपत्तियों को दूर करने के लिए कॉलेज प्रशासन के प्रयास न के बराबर ही हुए। इसके चलते भवन निर्माण कार्य लटका रहा।
इस पुराने भवन को गिराकर ही इसकी जगह नया भवन बनाया जाना है। ऐसे में निश्चित है कि इसमें बनाई गई लैब, सम्मेलन कक्ष सहित ई-कॉमर्स लैब पर किया गया तकरीबन 70 लाख से अधिक का खर्चा काफी हद तक बेकार जाएगा। हालांकि, इसके कंप्यूटर और उपकरण फिर से प्रयोग में लाए जा सकेंगे। इस पूरे मामले में दूरदर्शिता की कमी जरूर लगती है। परिसर में आधुनिक लैब के स्थापित किए जाने से कॉलेज में अध्ययनरत छात्राओं को सुविधा जरूर हुई मगर अब नए ब्लॉक का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए आधुनिक लैब को शिफ्ट करना जरूरी होगा। खास यह है कि इसके लिए कॉलेज में फिलहाल उपयुक्त जगह भी नजर नहीं है। यदि लैब को शिफ्ट किया जाता है तो दोबारा से इसे स्थापित करने पर खर्चा होगा। अब कॉलेज में ई कामर्स, लैग्वेंज के कोर्स शुरू कर दिए गए हैं। ऐसे में कॉलेज प्रशासन के पास पुराने भवन को गिराकर इसकी जगह नया भवन बनाए जाने की स्थिति में लैब को उपयुक्त जगह मिलना भी मुश्किल होगा।
‘नया भवन पुराने भवन की जगह ही बनाया जाना है। इसकी हालत जर्जर है। निश्चित रूप से यहां स्थापित लैब को शिफ्ट करना मुश्किल होगा। इसके लिए फिलहाल जगह उपलब्ध नहीं है। बावजूद इसके जगह तलाशी जाएगी ताकि अस्थाई रूप से लैब चालू रखी जा सके। नए भवन का निर्माण शुरू करवाने को प्रयास किया जा रहा है।’ – मीरा वालिया, प्राचार्य, आरकेएमवी
