किसान संगठनों का रणनीति में बदलाव दूसरे राज्यों में आंदोलन तेज करने पर फोकस

किसान संगठनों का रणनीति में बदलाव दूसरे राज्यों में आंदोलन तेज करने पर फोकस

चंडीगढ़
समर्थन हासिल करने के लिए किसान नेता दूसरे राज्यों के किसान आंदोलन में कर रहे हैं शिरकत
पटना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के किसान नेताओं के संपर्क में पंजाब के किसान संगठन

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली कूच के एक माह बाद अब किसान नेताओं ने आंदोलन की रणनीति में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। रणनीति के तहत ही अब वे आंदोलन को दूसरे राज्यों तक ले जाने में फोकस कर रहे हैं। दिल्ली बॉर्डर पर बैठे कई किसान संगठनों ने इसकी पहल शुरू कर दी है। किसान नेता पटना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के साथ ही अन्य राज्यों के किसान संगठनों से संपर्क साधने में लगे हैं। साथ ही वहां आयोजित होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में भी हिस्सा लेकर उनका समर्थन हासिल कर रहे हैं।

केंद्र के नेता किसान आंदोलन को लेकर आए दिन बयान दे रहे हैं कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का यह आंदोलन सिर्फ पंजाब तक ही सीमित है। इसे वहां की सत्तासीन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हवा देने में लगे हुए हैं। केंद्र की तरफ से आने वाले ऐसे बयानों को किसान संगठनों ने गंभीरता से लेते हुए रणनीति में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। इसी के तहत अब दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे कई किसान संगठनों ने दूसरे राज्यों में आंदोलन तेज करने के उद्देश्य से वहां के किसान संगठनों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। साथ ही वहां पर कृषि कानूनों के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में हिस्सा लेकर समर्थन हासिल करना भी शुरू कर दिया है। 

हाल ही में पंजाब की कीर्ति किसान यूनियन के कुछ नेता मुंबई में आयोजित हुए किसानों के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए थे। अब भारतीय किसान यूनियन (दकौंडा) के किसान नेता 29 दिसंबर को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित होने वाले किसानों के एक प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि इस रणनीति के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। दूसरे राज्यों के किसान संगठन उनसे संपर्क कर रहे हैं और आंदोलन में हर संभव मदद का आश्वासन भी दे रहे हैं।
किसान आंदोलन देश के 500 शहरों में पहुंचाने का लक्ष्य
ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-ऑर्डिनेशन कमेटी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार दिसंबर के अंत तक इस रणनीति पर कार्य किया जाएगा। रणनीति के तहत तय किया गया है कि कृषि कानूनों के खिलाफ यह किसान आंदोलन देश के 15 से अधिक राज्यों के 500 शहरों तक पहुंचाया जा सके। इसी पर किसान संगठन कार्य करने में लगे हुए हैं।

विपक्ष का भी मिल रहा है साथ
कांग्रेस सहित पंजाब के अन्य विपक्षी दल भी किसानों के आंदोलन को विस्तार देने में लगे हुए हैं। शिरोमणि अकाली दल ने आंदोलन को गति देने के उद्देश्य से पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं को लेकर एक कमेटी का गठन किया है, जो दूसरे राज्यों में जाकर किसान आंदोलन में सहयोग देने को लेकर समर्थन जुटा रहे हैं। कांग्रेस और आप भी शिअद की राह पर हैं। दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुट होकर काम कर रहे हैं।

किसान नेताओं ने कहा…
दिल्ली धरने में बैठे किसान संगठनों में लगभग 25 किसान संगठन इस रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। धीरे-धीरे राज्य के अन्य संगठनों का भी इसमें साथ मिलना शुरू हो गया है। जल्द ही पंजाब और हरियाणा से शुरू हुए इस किसान आंदोलन को विस्तारित किया जाएगा।
– सतबीर सिंह, महासचिव, कीर्ति किसान यूनियन, पंजाब

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन अब देश व्यापी हो चुका है। किसान संगठनों की यह पहल अच्छी है। केंद्र की सरकार के अड़ियल रुख को देखते हुए पंजाब और हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी आंदोलन तेज हो चुका है। जल्द ही इसके अच्छे परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।
– सुखदेव सिंह कोकरी कलां, महासचिव, भाकियू एकता (उगराहां)

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