
चंडीगढ़
तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे पंजाब के किसानों ने जहां देशभर के किसान संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली की घेराबंदी की हुई है। वहीं पंजाब में किसान परिवारों की महिलाएं और बच्चे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन को जारी रखकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हैं। भाकियू एकता (उगराहां) ने बताया है कि पंजाब के 12 जिलों में भाजपा नेताओं के घरों और कॉरपोरेट घरानों के पेट्रोल पंपों समेत 40 स्थानों पर किसानों का धरना जारी है।
भाकियू एकता उगराहां के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने बताया कि पंजाब में लगभग सभी गांवों से नौजवान और महिलाओं समेत किसान- मजदूरों के दल राज्य में जारी धरना-प्रदर्शनों में हर रोज शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को भारत बंद के दौरान पंजाब व दिल्ली में कुल मिलाकर ढाई लाख किसान, मजदूर, युवक, महिलाएं और बच्चे मैदान में उतरे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली बार्डर और पंजाब के भीतर विरोध प्रदर्शन जारी हैं और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब में जारी धरना-प्रदर्शनों में इन दिनों स्थानीय युवा, जिला व ब्लाक स्तर के नेताओं के साथ मिलकर आंदोलन की कमान संभाल रहे हैं।
यूके व इटली में बसे वाल्मीकि और राजपूत भी किसानों के पक्ष में
आंदोलन में किसानों को विदेश में बसे भारतीयों का भी समर्थन मिल रहा है। यूरोप के विभिन्न देशों में बसे भारतीय किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को लंदन में सेंट्रल वाल्मीकि सभा इंटरनेशनल यूके और इटली के ब्रेसिया में राजपूत यूनियन ने किसानों के पक्ष में प्रदर्शन किया।
सेंट्रल वाल्मीकि सभा इंटरनेशनल के पदाधिकारी एडवोकेट अश्विनी बगानिया ने बताया कि उनकी सभा के सदस्यों ने लंदन में एक कार रैली निकालकर दिल्ली बॉर्डर पर केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों का समर्थन किया है। उन्होंने आंदोलनकारी किसानों को भरोसा दिया है कि विदेश में रह रहा वाल्मीकि समाज भी इस लड़ाई में उनके साथ है।
बगानिया ने बताया कि लंदन के अलावा मंगलवार को इटली के ब्रेसिया शहर में भी भारतीय राजपूत समुदाय के लोगों ने आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में रैली निकाली और भारत सरकार से अपील की है कि वह किसानों की मांगें मानते हुए तीनों विवादित कानूनों को वापस ले।
