
कुल्लू
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अटल टनल रोहतांग देश-विदेश के लाखों सैलानियों को लाहौल की वादियों को निहारने का रास्ता आसान कर देगी। सामरिक महत्व की 9.02 किलोमीटर लंबी टनल पर्यटकों को बर्फ के दीदार के साथ अपनी ओर भी आकर्षित करेगी। घटों तक लंबे जाम से भी छुटकारा मिलेगा। इसके निर्माण में दस साल लगे हैं। रोहतांग में बर्फ का दीदार करने वाले सैलानियों के वाहन अब टनल के रास्ते जाएंगे और रोहतांग दर्रा होकर मनाली लौटेंगे। इसे उनका आनंद भी दोगुना होने वाला है। रोहतांग दर्रे से गुजरने वाला मार्ग डबललेन है, मगर वनवे रहने से सैलानियों को फायदा होगा।
जाम की परेशानी के साथ उनके समय की भी बचत होगी। पहले पचालन से रोहतांग दर्रे तक पहुंचने के लिए 15 से 20 घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ता था। कई बार जाम से पर्यटक वाहन 24 घंटे बाद मनाली लौट पाते थे लेकिन, अब ये सब नहीं सहना पड़ेगा। दस से 15 किलोमीटर लंबे जाम को अब टनल राहत प्रदान करेगी। सेना को भी अब 13050 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे को लांघने की जरूरत नहीं होगी।
टनल से पर्यटक वाहनों को भेजने से कारोबारियों पर पड़ेगा असर
होटल एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अनूप राम ठाकुर ने कहा कि प्रशासन चाहता है कि टनल से पर्यटक वाहन जाकर रोहतांग दर्रे से वापस मनाली आएं लेकिन, पर्यटन कारोबारी इसके पक्ष में नहीं है। अगर प्रशासन टनल को वनवे करना चाहता है तो पर्यटक वाहनों को गुलाबा से भेजा जाए और टनल के रास्ते वापस किया जा सकता है। टनल से पर्यटकों को भेजने से सैकड़ों पर्यटन कारोबारियों के कारोबार पर असर पड़ेगा।
