
नई दिल्ली
दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। पांच अक्तूबर से दिल्ली के हर इलाके में सरकारी एजेसियां निगरानी सख्त करेंगी। वहीं, पराली के धुएं को रोकने के लिए सरकार किसानों के घर दस्तक देगी। सरकार का मानना है कि इस बार प्रदूषण का स्तर पिछले साल के 25 फीसदी से ज्यादा नीचे लाया जाएगा।
इसकी जानकारी देते हुए दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि बृहस्पतिवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी के संबंधित मंत्रियों के साथ संयुक्त बैठक हुई। इसमें पराली जलाने के समाधान, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में चल रहे पॉवर प्लांट और पुरानी तकनीक से चल रहे ईंट भठ्ठों से होने वाले पदूषण पर संबंधित राज्य सरकारों से चर्चा हुई। पराली के लिए दिल्ली सरकार ने पूसा के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान को अपनाने पर जोर दिया।
गोपाल राय ने बताया कि बीते 3 हफ्ते से अलग-अलग विभागों के साथ पर्यावरण विभाग ने इससे जुड़ी एजेसियों के साथ लगातार बैठकें की हैं। इसके बाद एक एक्शन प्लान तैयार हुआ है। पांच अक्तूबर को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसे लांच करेंगे। इससे पहले उनकी अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में धूल, वाहन, बॉयोमास प्रदूषण के अलग-अलग क्षेत्रों के जिम्मेदार विभागों की बैठक होगी। इसमें सभी विभाग अपना एक्शन प्लान बताएंगे। गोपाल राय ने उम्मीद जताई कि इस बार प्रदूषण स्तर में ज्यादा कमी आएगी।
वृक्षारोपण अभियान जारी
गोपाल राय ने बताया कि अगले 5 साल में दिल्ली के अंदर दो करोड़ पौधे लगाए जाने हैं। हरित क्षेत्र बढने से प्रदूषण के स्तर को कम करने का स्थाई समाधान मिलेगा। कोरोना काल में भी सरकार ने लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अपना कदम बढ़ाया है और बड़े पैमाने पर दिल्ली के अंदर अलग-अलग एजेंसियों के साथ मिलकर के वृक्षारोपण का काम चल रहा है।
पिछली साल 45 फीसदी प्रदूषण पराली से
गोपाल राय ने बताया कि पिछले साल दिल्ली के प्रदूषण में करीब 45 फीसदी योगदान पराली के धुएं का रहा है। जब ठंड बढ़ती है, उसी समय दीपावली का पर्व भी होता है, उस समय पराली का धुंआ पूरी तरह से दिल्ली के वातावरण पर उसकी चादर घेर लेती है। इसके साथ दिल्ली के चारों तरफ स्थित शहरों गाजियाबाद, नोएडा, गुडग़ांव हैं, उनके इलाकों में जो गतिविधियां चलती हैं, इससे भी दिल्ली का प्रदूषण स्तर बढ़ता है। गोपाल राय के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के 300 किमी के क्षेत्र में 11 थर्मल पॉवर पुरानी तकनीक के आधार पर चल रहा है। आंकड़े कहते हैं कि इसकी वजह से दिल्ली में पीएम-10 की 9 प्रतिशत और पीएम- 2.5 की करीब 11 प्रतिशत की वृद्धि होती है। इसके अलावा एनसीआर के यूपी के हिस्से में 1640 ईंट भठ्टे हैं। वहीं, हरियाणा व राजस्थान मे इनकी संख्या 161 व 164 है। इसका असर भी प्रदूषण पर पड़ता है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के साथ बैठक, मांगा सहयोग
गोपाल राय ने कहा कि बृहस्पतिवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली पंजाब, हरियाणा और उतर प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की है। दिल्ली के अंदर जो पराली की समस्या है, चूंकि यहां पर बासमती धान ज्यादा उगाया जाता है, लेकिन उसके अलावा गैर बासमती धान जहां होता है, वो लगभग 800 हेक्टेयर का क्षेत्रफल है। बैठक में दिल्ली ने बता दिया कि हम पराली से निपटने के लिए तैयार है। इसके लिए सरकार हर किसान के घर जाएगी। साथ ही केंद्रीय मंत्री और सभी राज्यों के मंत्रियों से अपील की कि वह अपने अपने राज्यों में प्रदूषण स्तर कम करें।
