
मंडी। दुराचार का अभियोग साबित न होने पर अदालत ने एक आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। इस मामले की पीड़िता के बयानों से मुकर जाने पर अदालत ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेंद्र सिंह के न्यायालय ने औट तहसील के टकोली (पनारसा) निवासी राम प्रकाश पुत्र रेवत राम के खिलाफ भादंसं की धारा 376, 452 और 506 के तहत अभियोग साबित न होने पर अदालत ने उसे बरी करने का फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले की पीड़िता के बयानों से मुकर जाने के कारण उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता ने अपने परिजनों के साथ औट थाना में आकर प्राथमिकी दर्ज करवाई थी कि 22 अगस्त 2008 को पीड़िता रात के समय टकोली गांव स्थित अपने क्वार्टर में थी। इसी दौरान आरोपी वहां आया और उसके साथ दुराचार किया। आरोपी ने उसे इस बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने पीड़िता के बयान पर आरोपी को हिरासत में लेने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में 11 गवाहों के बयान कलमबंद किये गए। बचाव पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता समीर कश्यप का कहना था कि पीड़िता ने अदालत के समक्ष विरोधाभासी बयान दिए हैं। पीड़िता ने आरोपी को अंधेरा होने के कारण पहचाना नहीं था। इसके अलावा अन्य गवाहों ने भी विरोधाभासी बयान दिए हैं, जिससे आरोपी पर अभियोग साबित नहीं होता। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों को आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाफी माना। इसके चलते अदालत ने आरोपी के खिलाफ संदेह की छाया से दूर अभियोग साबित न होने के कारण उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। वहीं पर अदालत ने पीड़िता के अदालत में अपने ब्यान से मुकर जाने पर संज्ञान लेते हुए पीड़िता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
