
बिलासपुर/बरमाणा। एनटीपीसी के खिलाफ विस्थापितों का आंदोलन तनावपूर्ण स्थिति पर पहुंच गया है। मंगलवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया लेकिन अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी नहीं मानें और गाड़ियों में सवार होकर जिला मुख्यालय पहुंच गए। यहां डीसी दफ्तर में विस्थापितों ने जोरदार प्रदर्शन किया। डीसी दफ्तर के बाहर दर्जनों पुलिस जवानों को तैनात करना पड़ा। परियोजना स्थल पर भी तृतीय वाहिनी के जवानों की दो बसें बुलानी पड़ी।
जिला प्रशासन ने परियोजना स्थल में धारा 144 लागू कर दी है लेकिन इसकी परवाह किए बगैर मंगलवार चार जिला के विस्थापितों ने फिर आंदोलन का आगाज किया। एसडीएम और एएसपी ने वहां पहुंचकर उन्हें वहां से हटने के लिए कहा। प्रदर्शनकारी नहीं मानें तो पुलिस को वहां पर तृतीय वाहिनी के जवानों को तैनात करना पड़ा। जीरो चौक से हटकर प्रदर्शनकारी बैंक के समीप एक खेत में बैठ गए, मगर वहां से भी उन्हें खदेड़ दिया गया। इस बीच पुलिस कर्मियों और विस्थापितों के बीच कहासुनी भी हुई। विस्थापित वहां से हटे तो बसों और गाड़ियों में सवार होकर बिलासपुर मुख्यालय पहुंच गए।
सैकड़ों विस्थापितों ने कालेज चौक से उपायुक्त कार्यालय तक साडा हक इत्थे रख…, जैसे जोशीले नारे लगाते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। इसमें महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल रहे। कार्यालय के बाहर तकरीबन डेढ़ घंटे तक धरना दिया। विस्थापित नेता बाबू राम ठाकुर की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त डॉ. अजय शर्मा से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर भी गाली गलौच और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
विस्थापितों की मुख्य मांगें
बरमाणा। कोल डेम विस्थापित परियोजना में परिवार के एक सदस्य को रोजगार, मुफ्त बिजली-पानी, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा तथा अन्य स्थानीय मांगों पर अडे़ हैं। विस्थापित नेता बाबू राम ठाकुर, अशोक, अनिल, तुलसी गौतम, विद्या, तुलसी राम, रघुवंशी, अजय शर्मा, प्रमोद कुमार, विक्रम ठाकुर, मस्त राम बंसल, कमला आदि ने कहा कि परियोजना प्रबंधन के साथ कई समझौते हुए, किंतु मांगें नहीं मानी गई। यदि परियोजना में रोजगार नहीं है तो प्रति परिवार 25-25 लाख रुपये दिए जाएं।
