
नई दिल्ली

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में शामिल होने वाली 1000 लो फ्लोर और इलेक्ट्रिक बसों में चीन की कंपनियों में तैयार कल पुर्जों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
भारत-चीन सीमा पर चल रहे विवाद को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बसों के लिए होने वाले टेंडर में इस शर्त को शामिल किया है। सरकार के इस फैसले से चीन को गहरा झटका लगेगा। अब तक बसों में चीन में निर्मित जीपीएस, पैनिक बटन, सीसीटीवी सहित कुछ अन्य कल पुर्जें इस्तेमाल किए जाते रहे हैं।
सरकार की शर्त के मुताबिक नई बसों में चीन निर्मित किसी भी उत्पाद (कल पुर्जे) का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इससे चीन की कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। 10 वर्ष बाद डीटीसी के बेड़े में इतनी अधिक संख्या में बसें शामिल की जाएंगी।
टेंडर की शर्तों में बदलाव का निर्णय कमेटी के सभी सदस्यों की सहमति के बाद लिया गया है। कल पुर्जों की जरूरतें समय पर पूरी करने के लिए सरकार, चीन की बजाय ताइवान, दक्षिण कोरिया सहित अन्य देशों को तरजीह देगी।
रकार की यह भी कोशिश है कि परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए विदेश के साथ-साथ घरेलू कंपनियों को भी मौका दिया जाए। ताकि कल पुर्जों के लिए आयात पर कम से कम निर्भर रहना पड़े।
