एलएसी पर बढ़ी सुरक्षा, चीनी सैनिकों पर इस्राइली हेरॉन ड्रोन से रखी जा रही नजर

नई दिल्ली

Israeli Heron drones

चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव के मद्देनजर भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कमर कस ली है। आईटीबीपी के साथ-साथ, उत्तरी मोर्चे पर लड़ने के लिए पिछले दशकों में प्रशिक्षित विशेष बलों को अब सीमा पर आगे कर दिया गया है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के विपरीत, जो लड़ने के लिए पैदल सेना वाहनों का प्रयोग करती है। भारतीय पहाड़ी सैनिकों को गुरिल्ला युद्ध और उच्च ऊंचाई वाले युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अपने दमखम को प्रदर्शित किया था।
अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में चीनी बलों पर निगरानी के लिए इस्राइली हेरॉन ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा टेक निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी गतिविधि का फौरन पता लगाया जा सके।

यह भी पढ़ें: भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच सिक्किम में हुई झड़प का वीडियो वायरल, सेना ने बताया झूठा

एक पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ‘पहाड़ों पर लड़ाई की कला सबसे कठिन होती है, क्योंकि ऊंचाई पर बैठे दुश्मन के मुकाबले नीचे से लड़ रही टुकड़ी के हताहत होने की संभावना ज्यादा रहती है।’ उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड, लद्दाख, गोरखा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की टुकड़ियों ने सदियों से इन ऊंचाई वाली परिस्थितियों को अपना लिया है और इस तरह उनकी इन क्षेत्रों में लड़ाई करने की क्षमता का कोई मुकाबला नहीं है। तोपखाने और मिसाइलों की पिन पॉइंट सटीकता होती है वरना वे मीलों तक पहाड़ पर निशाने से चूक जाएंगे।’

साउथ ब्लॉक में चीन मामलों पर एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘चीन के हिस्से वाले तिब्बती पठार समतल है, जबकि भारतीय इलाका काराकोरम में के2 चोटी से, उत्तराखंड में नंदा देवी से, सिक्किम में कंचनजंगा से और अरुणाचल प्रदेश सीमा के नामचे बरवा से शुरू होता है। पहाड़ों में न केवल क्षेत्र पर कब्जा करना मुश्किल है बल्कि इसपर कब्जा किए रखना भी मुश्किल है।’

अधिकारियों ने बताया कि भारत लंबे समय तक लड़ने में सक्षम है। वहीं, एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हमारी बटालियन हथियारबंद जवानों और तोप के साथ सीमा पर तैनात है। भारत किसी झड़प के लिए न तो उकसाएगा और न उपद्रव करेगा बल्कि नियमों के हर उल्लंघन का जवाब देगा।

यह भी पढ़ें: भारत ने एलएसी पर तैनात की विशेष पर्वतीय सेना, चीन के पास इसका तोड़ नहीं

अधिकारियों ने आगे कहा कि मोदी सरकार इस बात से नाखुश है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएलए पश्चिमी थिएटर कमांडर जनरल झाओ जोंग्की पर लगाम नहीं लगाई है, जो भारतीय क्षेत्र पर दावा करते हुए 1960 के पूर्वी लद्दाख नक्शे को लागू करने को इच्छुक हैं।

इस नक्शे में चीन कोंगका ला इलाके पर अपना दावा करता है और इस नक्शे का चीन के पूर्व प्रमुख चाउ एन लाई द्वारा अनावरण किया गया था। चाउ के नेतृत्व में ही 1962 में भारत-चीन युद्ध हुआ था।

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वुहान और ममल्लापुरम शिखर सम्मेलन शुरू किया, ताकि भारत और चीन के दोनों नेता दोकलम विवाद के बाद द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा दे सकें। साथ ही नक्शा विवाद सहित कई अन्य मुद्दों को सुलझाया जा सके।

 

Related posts