
चंडीगढ़,

बिहार पुलिस पिछले तीन दिनों से पंजाब के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के घर के बाहर डेरा डाल हुए है लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू से मिल नहीं पा रही है। पुलिस ने सिद्धू के घर का कई बार दरवाजा भी खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…
अमृतसर के होली सिटी स्थित पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के घर के बाहर बिहार पुलिस तीन दिन से रुकी है। पुलिस अप्रैल 2019 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सिद्धू द्वारा की आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में आई है। बिहार के कटिहार जिले के वरसोई थाने से आए इन पुलिसकर्मियों ने सिद्धू के घर का दरवाजा कई बार खटखटाया लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। सिद्धू घर में मौजूद हैं या नहीं, इसकी भी जानकारी नहीं है।
पुलिसकर्मियों का कहना है कि वे पिछले तीन दिन से सिद्धू की कोठी के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। बिहार में जिस समय मामला दर्ज हुआ था, उस समय सिद्धू को थाने से जमानत मिल गई थी। अब जमानत की अवधि समाप्त हो रही है। पुलिस के मुताबिक इस अवधि को बढ़ाने के लिए उन्हें जरूरी दस्तावेजों पर साइन चाहिए थे। उन्होंने बताया कि अगर सिद्धू के साइन नहीं मिले तो उनकी जमानत खत्म हो जाएगी।
क्या कहा था सिद्धू ने
सिद्धू पर आरोप है कि उन्होंने बिहार के कटिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस उम्मीदवार के लिए रैली में सांप्रदायिक टिप्पणी की थी। इसके बाद वहां के भाजपा के एक नेता ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप के मुताबिक सिद्धू ने एक समुदाय को एकजुट होकर मतदान करने की अपील की थी। सिद्धू ने कहा था कि आप यहां 64 फीसदी आबादी हैं।
आप पंजाब में भी काम करने जाते हो। अगर आपको कोई दिक्कत हो तो मुझे याद करना। मैं पंजाब का मंत्री हूं, वहां भी आपका साथ दूंगा। यहां जात-पात की राजनीति हो रही है। बांटने की राजनीति हो रही। बीजेपी के लोग यहां आकर आपके वोट को बांटने की कोशिश करेंगे। अगर आप इकट्ठे रहे तो कांग्रेस को कोई नहीं हरा सकता।
लद्दाख में चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सिपाही गुरविंदर सिंह (22) को आंसुओं के सैलाब के बीच शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। शुक्रवार शाम शहीद का पार्थिव शरीर गांव तोलावाल पहुंचा। जैसे ही पार्थिव शरीर गांव में उनके घर पहुंचा तो तिरंगे में लिपटे ताबूत को देखकर मां चरणजीत कौर के सब्र का बांध टूट गया। ताबूत से लिपटकर रोती मां को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
चरणजीत कौर ने अपने बेटे को प्यार से रखे नाम ‘मोहनी’ कह कर पुकारा। ‘खड़ा हो जा पुत्त मोहनी कित्थे चला गया तूं, रब्बा मैनूं ही चक लेंदा, मेरे पुत्त नूं भरी जवानी विच्च ले गया।’ बार- बार मां अपने बेटे को छूने की कोशिश करती रहीं। शहीद की बड़ी बहन सुखजीत कौर रोते-रोते बोली ‘वीरे तूं छेती आऊण दा वादा करके कित्थे चला गया, असीं तां तेरे विवाह दीयां तैयारियां कर रहे सी।’ पिता लाभ सिंह और बडे़ भाई गुरप्रीत सिंह भी फूट फूट कर रोए। उन्होंने कहा कि अपने बेटे की शहादत पर नाज है लेकिन यह दुख जीवन में भूल नहीं सकते हैं।
लाभ सिंह ने कहा कि उनका बेटा बेहद विनम्र व बहादुर था। अंतिम संस्कार से पहले परिजनों ने शहीद के सिर पर सेहरा सजाया और अपने नौजवान बेटे को अंतिम सलामी दी। मातमी धुनों के बीच भारतीय सेना ने अपने हथियार उल्टे करके शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर और सलामी दी। इसके बाद आर्मी अधिकारियों ने परिजनों को ताबूत में लिपटा तिरंगा सौंपा। शहीद के पिता व भाई ने चिता को मुखाग्नि दी।
शहीद गुरविंदर सिंह की पार्थिव देह के काफिले पर जखेपल, हंबलवास, चौबास व धालीवाल आदि गांवों के लोगों ने फूलों की वर्षा करके श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बड़ी संख्या में लोग सड़क के किनारे खडे़ रहे और काफिले के आने पर शहीद गुरविंदर अमर रहे के नारों के बीच फूल अर्पित किए। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शहीद के घर पहुंचकर परिजनों से संवेदना जताई।
पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा के अलावा एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने भी पीड़ित परिवार से दुख साझा किया। अंतिम संस्कार के दौरान कैबिनेट मंत्री विजयइंदर सिंगला, पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना और विधायक अमन अरोड़ा समेत डीसी रामवीर, एसएसपी संदीप गर्ग मौजूद रहे।
गांव के स्कूल को दिया शहीद गुरविंदर सिंह का नाम
शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने एलान किया कि पंजाब सरकार की तरफ से शहीद की याद को शाश्वत बनाने को गांव के सरकारी स्कूल का नाम शहीद गुरविंदर सिंह के नाम पर रखा जाएगा। इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की तरफ से बाकी तीन शहीदों के सम्मान में भी उनके गांवों के सरकारी स्कूलों के नाम भी शहीदों के नाम पर रखे जाएंगे।
