

उन्होंने बताया कि व्यापक खोज, गुप्त सूचना और तकनीकी अध्ययन के निष्कर्ष के तौर पर ही पुलिस द्वारा यह केस हल किया गया है। इस मामले आरोपियों की पहचान सुखविंदर सिंह उर्फ बाबा भूंडी, तरसेम सिंह उर्फ ग्रोटा, बलविंदर सिंह उर्फ बिल्ला पुत्र तरसेम सिंह, सुखचैन सिंह उर्फ चैना पुत्र प्रेम सिंह (सभी निवासी गांव खुरमणीयां जिला अमृतसर) और सतनाम सिंह उर्फ सत्ता और रवि पुत्र इकबाल सिंह (दोनों निवासी गांव संघा) थाना सदर तरनतारन के तौर पर हुई है।
24 फरवरी की रात को हुई लूट के बाद बाबा महेंद्र सिंह के बयान के आधार पर अंजान व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर (नं. 66, धारा 379 बी, 342, 459, 506, 34 आइपीसी के तहत) दर्ज की थी। इसके बाद 1 मार्च को एफआईआर में आईपीसी की एक अन्य धारा 395 शामिल की गई थी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने सभी की सही पहचान की। सुखचैन सिंह को 28 फरवरी को गिरफ्तार किया गया जबकि अगले दिन सतनाम सिंह को काबू कर लिया गया।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
डीजीपी ने बताया कि सुखचैन सिंह, जो हाल ही में अमृतसर जेल से बाहर आया और फिर अन्य आरोपियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया था। सुखचैन सिंह को छोड़कर बाकी सभी पांच आरोपी लूट की रात एक स्विफ्ट कार में डेरे आए थे। उनमें से दो कार में रुके थे। अगली जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए कोई हथियार नहीं इस्तेमाल किया गया था।
डकैती के दौरान इस्तेमाल की गई स्विफ्ट बलविदंर सिंह के पास से बरामद की गई। डीजीपी के अनुसार तरनतारन पुलिस ने एक लाख रुपये बरामद किये। सुखचैन सिंह के घर से चोरी की गई नकदी के 12 लाख रुपये और सतनाम सिंह के घर से करीब 5.65 लाख रुपये बरामद किये गए। सुखचैन सिंह से पूछताछ के आधार पर 5 मार्च को डीएसपी/क्राइम अगेंस्ट प्रॉपर्टी के नेतृत्व वाली टीम, तरनतारन के विरुद्ध 95.5 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई थी।
सुखचैन ने स्वीकार किया कि उसने रेलवे स्टेशन, अमृतसर के नजदीक सेठी मनी एक्सचेंजर नाम की दुकान से चोरी की गई नकदी को अमरीकी डॉलर में तब्दील करवा लिया था। उसने पंजाब और सिंध बैंक तरनतारन रोड अमृतसर में एक लॉकर में बदले हुए 1.30 लाख अमरीकी डॉलर और चोरी की गई नकदी के बाकी साढ़े चार लाख रुपये रखे। इसके बाद 5 मार्च को बैंक से कुल रकम वसूल की गई।
